किराये की यादें : नित्या सिंह

शहरों में मीठे -नमकीन से यादों के अनगिनत मकान अधिकतर किराए के हुआ करते हैं ,जिनमें रहने वाले लोग जाने- अनजाने में कभी न भूल सकने वाले लम्हें जोड़ जाते हैं या फिर टूट-टूट के बिखरती रिसती कहानियों को छोड़ जाते हैं जिनकी साक्षी बनती हैं इन कमरों की बेजान दीवारें ,जो न केवल ध्यान से सुनती हैं उन बातों को जो बोल दी गयी और जो चाहकर भी न बोली गयी बल्कि अपनी खुली आँखों से इन दृश्यों को देखती भी हैं अपने अनुभवों में सहेज लेने के लिए…

अर्जक संघ और रामस्वरूप वर्मा: उपेन्द्र पथिक

आज़ादी के बाद भारत में समाज सुधार की आवश्यकता थी जिसे जाने माने समाज सुधारक और मानववादी दार्शनिक रामस्वरूप वर्मा जी ने अर्जक संघ की स्थापना करके पूरा किया. भारतीय समाज में पुनर्जन्म, भाग्यवाद, जातिगत भेदभाव, छुआछूत, कर्मकांड, धर्मांधता, कुरीतियां, सामंतवाद, विषमता, निरादर और दरिद्रता समेत कई प्रकार की समस्याएं व्याप्त थी.और आज भी हैं. इसके ख़िलाफ़ बहुजन/अर्जक समाज में समय समय पर अलग-अलग नायकों के आह्वान पर आवाजें उठती रही हैं. इन्हीं नायकों में जाने माने समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ, विद्वान लेखक, कुशल पत्रकार, वैज्ञानिक चेतना के वाहक, क्रांतिकारी, आंदोलनकारी…

लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण में स्थानीय स्वशासन का महत्व: आशीष मौर्य

लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में सुशासन तथा उसे सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए सत्ता के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता होती है|यह वह व्यवस्था है जिसमें विभिन्न स्तरों पर सत्ता,शक्ति तथा अधिकार विभक्त होते हैं|अर्थात् शीर्ष से तृणमूल स्तर तक सत्ता, शक्ति व संसाधनों का विभाजन|साथ ही प्रत्येक स्तर अपने कार्यों के लिए स्वयं उत्तरदायी होते हैं| सत्ता के विकेंद्रीकरण का उद्देश्य जनता को अधिकाधिक सत्ता में भागीदारी का अवसर प्रदान करना है|इसे ‘ग्रासरूट डेमोक्रेसी’ भी कहा जाता है|आर.बी.जैन के अनुसार,” संक्षेप में ‘ धरातल पर लोकतंत्र की अवधारणा’ केवल लोकतंत्र का…

उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है: प्रफुल्ल सिंह

जब विद्यार्थी सफलता का मुकाम हासिल करना चाहता है, या अपने जीवन को सफल करने के लिए जो उड़ान भरना चाहता है। उससे पूर्व अभिभावक व शिक्षक उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन उसके प्रतिभा को अवश्य ही निखारता है। अभिभावक व शिक्षक छात्रों के सुनहरे भविष्य के लिए उचित मार्गदर्शन दे सकते हैं। जिससे छात्रों के शरीर के अंदर, ऊर्जा उत्साह, जोश, एवं जुनून का संचार उत्पन्न होता है। जिससे विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त होता है। हमेशा से ही देखा गया है कि छात्रों को विषय का चुनाव सही ढंग…

भारत : वित्तीय स्थिति को बेहतर ढंग से संभालने की जरूरत, नहीं तो लातिन अमेरिका जैसा बन जायेगा

भारत में जब कोविड की दूसरी लहर अपना तांडव मचा रही है, तब तमाम अर्थशास्त्री आर्थिक वृद्धि दर के बारे में अपने अनुमानों में संशोधन कर रहे हैं. अधिकतर टीकाकार इस बात पर सहमत हैं कि इस साल के अंत में अर्थव्यवस्था उस स्तर पर पहुंच जाएगी जिस स्तर पर दो साल पहले थी. सवाल यह है कि उसके बाद क्या होगा. क्या यह उम्मीद की जाए कि आर्थिक वृद्धि में तेजी आएगी या देश को बीच में जाकर निराशा हाथ लगेगी? इसके जवाब में पहली बात यह है, जो…

क्यों मनाते हैं बुद्ध पूर्णिमा? जानें क्यों है यह खास

बुद्ध जयंती इस साल 26 मई दिन बुधवार को मनाई जाएगी, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। बुद्ध पूर्णिमा वैशाख पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था और कठिन साधना के बाद बुद्धत्व की प्राप्ति भी हुई थी। यह त्योहार हिंदू और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों के लिए बहुत खास है। ऐसी मान्यता है कि बुद्ध भगवान श्री हरि विष्णु के 9वें अवतार थे। इतिहास के जानकारों के अनुसार, भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में…

प्रभु की दुकान: प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम”

एक दिन में सड़क से जा रहा था, रास्ते में एक जगह बोर्ड लगा था, ईश्वरीय किराने की दुकान, मेरी जिज्ञासा बढ़ गई क्यों ना इस दुकान पर जाकर देखो इसमें बिकता क्या है? जैसे ही यह ख्याल आया दरवाजा अपने आप खुल गया, जरा सी जिज्ञासा रखते हैं तो द्वार अपने आप खुल जाते हैं, खोलने नहीं पड़ते, मैंने खुद को दुकान के अंदर पाया। मैंने दुकान के अंदर देखा जगह-जगह देवदूत खड़े थे, एक देवदूत ने मुझे टोकरी देते हुए कहा, मेरे बच्चे ध्यान से खरीदारी करना, यहां…

घबराएं नहीं, सकारात्मक सोच से हारेगा कोरोना : डॉ. नवल किशोर शाक्य

लखनऊ (दस्तक चाणक्य के सम्पादक आदर्श कुमार से विशेष वार्ता): कोरोना पॉजिटिव होने पर घबराएं नहीं, बल्कि अपनी सोच सकारात्मक रखें। आत्मविश्वास को मजबूत रखें। कोरोना को हराने के लिए यह जरूरी है। चिकित्सकों की सलाह का पालन करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई का सेवन करें। ऐसा कर आप निश्चित रूप से कोरोना को मात देने में सफल रहेंगे। यह बातें लक्ष्य कैंसर हॉस्पिटल के सृजन डॉ नवल किशोर शाक्य ने कही । उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोरोना के नए रोगियों में बढ़ोत्तरी रही है । जांच रिपोर्ट…

बुद्ध के अर्थों में सुख क्या है: बौद्ध भिक्षु सुमितरत्न

एक दिन बहुत से भिक्षु बैठे बात कर रहे थे कि संसार में सबसे बड़ा सुख क्या है ? अगर संसार में सुख ही था तो छोड़कर आए क्‍यों ? जब संसार में दुःख ही दुःख रह जाए, तभी तो कोई संन्यस्त होता है। जब यह समझ में आ जाए कि यहाँ कुछ भी नहीं है । खाली पानी के बबूले हैं, आकाश में बने इंद्रघनुष हैं, आकाश कुसुम है, यहाँ कुछ भी नहीं है, तभी तो कोई संन्यासी होता है । संन्यास का अर्थ ही है, संसार व्यर्थ हो…

सरकार जिम्मेदार है : भारत एक भयानक संकट के बीच खड़ा है

भारत आज जिस संकट में फंस गया है उसका बयान इसी तरह किया जा सकता है. वह ऑक्सीजन से लेकर एन-95 मास्क तक और ऑक्सीमीटर से लेकर वैक्सीन तक तमाम चीजों के लिए बड़े देशों से मदद मांग रहा है. और ये सारी चीजें लेकर जब विशाल मालवाही विमान हमारी धरती पर उतरेंगे तब हमारे तमाम केंद्रीय मंत्री खुशी से ट्वीट कर रहे होंगे. अभी कुछ सप्ताह पहले तक वे इस संभावना को बड़ी नफरत से खारिज कर रहे थे कि हमारे ‘न्यू इंडिया’ को विदेशी मदद की जरूरत पड़…

झूठ को सच हमेशा बताना पड़ा: बलजीत सिंह बेनाम

ग़ज़ल झूठ को सच हमेशा बताना पड़ाफ़र्ज़ यूँ भी बशर का निभाना पड़ा आपकी बज़्म में लौटने के लिएहर क़दम क़ीमतों को बढ़ाना पड़ा ज़िंदगी के सभी सुर समझ आ गएप्यार के राग को भूल जाना पड़ा इक सुहागन को जीवन ही सारा अगरएक विधवा के जैसे बिताना पड़ा बेसबब गर्व का खामियाज़ा यहीसर झुकाया नहीं सर कटाना पड़ा बलजीत सिंह बेनाम       सम्प्रति:संगीत अध्यापक        सम्पर्क सूत्र: 103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी, हाँसीज़िला हिसार(हरियाणा)मोबाईल नंबर:9996266210

प्रकृति की सहनशीलता अब खत्म होने को: प्रफुल्ल सिंह “बेचैन

प्रकृति, जिसके जितने करीब जाओ उतनी ही अपनी ओर खींचने को आतुर। बाहरी और आंतरिक सौंदर्य से लबालब। अद्भुत सम्मोहन शक्ति की स्वामिनी। इतनी मोहक कि एक रूखा व्यक्ति भी दो पल के लिए ठिठक जाता है। विभिन्न रूप और हर रूप का अपना अलग दैवीय सौंदर्य। इसके सौंदर्य का रसपान एक प्रकृति प्रेमी ही कर सकता है। वही महसूस कर सकता है इसकी विभीषिक में, कांटों में और संघर्षों में भी इसका अनूठा सौंदर्य।  सघन अरण्य की ओर रुख करें तो अपने बाहुपाश में बांध लेती है प्रकृति। अनुपम सौंदर्य,…

लेखक का पैसा : प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम”

साहित्य के सब नहीं तो बहुतेरे आयोजन आज भी स्नेह-भाव से ही होते हैं। उसमें आयोजक कोई लाभ नहीं कमाता। उलटे खीसे की गांठ ढीली करके बंदोबस्त-तमाम करता है। मंच, माइक और माला का पैसा जेब से देता है। हिन्दी का लेखक भी कोई वैसा नक्षत्र नहीं, जिसे सुनने के लिए कोई टिकट ख़रीदकर सभागार में आता हो, जिस पर फिर यवनिका-पतन के बाद लेखक अपना दावा पेश करे और मुनाफ़े में हिस्सेदारी की मांग करे। बहुधा तो ये आयोजन साहित्यानुरागियों के द्वारा उत्साह और प्रेमवश करवाए जाते हैं, कुछ…

हम हम सभी को जल संरक्षण का संकल्प लेना होगा : प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम”

संसार के प्रत्येक प्राणी का जीवन आधार जल ही है। शायद ही ऐसा कोई प्राणी हो जिसे जल की आवश्यकता न हो। जल हमें समुद्र, नदियों, तालाबों, झीलों, वर्षा एवं भूजल के माध्यम से प्राप्त होता है। गर्म हवाओं के चलने से समुद्र, नदियों, झीलों, तालाबों का जल वाष्पित होकर ठंडे स्थानों की ओर चलता है जहाँ पर न्यून तापमान के कारण संघनित होकर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरता है। जबकि पहाड़ों पर और भी कम तापमान होने के कारण जल बर्फ के रूप में जम जाता है…

मैं किन्नर क्या-क्या बन जाऊं

किन्नर भिक्षु भी हैं।किन्नर दानवीर भी हैं।किन्नर नृत्यकार भी हैं।किन्नर संगीतज्ञ भी हैं।किन्नर स्वयं न्यायाधीश,यम भी हैं।किन्नर विष्णु भी हैं।किन्नर मृत्यु भी हैं।किन्नर सुख भी हैं।किन्नर दुख भी हैं।किन्नर वैश्या भी हैं।किन्नर काम भी हैं।किन्नर काम नियंत्रक भी हैं।किन्नर लिंग धारी देवी भी हैंकिन्नर लिंग विच्छेद नारी भी हैं।किन्नर योनि धारी पुरुष भी हैं।किन्नर ब्रह्माण्ड का नायक भी हैं।किन्नर संतान श्रृजक भी हैं।किन्नर सांसारिक मोह में फंस कर भी विरक्त हैं।किन्नर गृह स्वामी हो कर भी सन्यासी हैं।किन्नर स्वर्ण और पाप को धारण कर पाप मुक्त है।किन्नर सभी देवताओं सर्वश्रेष्ठ…

जब बुद्ध ने समझाया मौन का महत्त्व

एक व्यक्ति, कोई जिज्ञासु, एक दिन आया। उसका नाम मौलुंकपुत्र था, एक बड़ा ब्राह्मण विद्वान्‌; पाँच सौ शिष्यों के साथ बुद्ध के पास आया था। निश्चित ही उसके पास बहुत सारे प्रश्न थे। एक बड़े विद्वान्‌ के पास ढेर सारे प्रश्न होते ही हैं, समस्याएँ ही समस्याएँ। बुद्ध ने उसके चेहरे की तरफ देखा और कहा, ‘मौलुंकपुत्र, एक शर्त है । यदि तुम शर्त पूरी करो, केवल तभी मैं उत्तर दे सकता हूँ। मैं तुम्हारे सिर में भनभनाते प्रश्नों को देख सकता हूँ। एक वर्ष तक प्रतीक्षा करो। ध्यान करो,…

एवरेस्ट विजेता आईएएस रविन्द्र को सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यान अज्ञेय सम्मान

 एवरेस्ट फतह करने वाले पहले आईएएस अधिकारी रविन्द्र कुमार को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यान अज्ञेय पुरस्कार मिलेगा। रविंद्र कुमार वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले के डीएम हैं। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर दूसरी बार फतह करनेवाले देश के प्रथम आईएस अधिकारी का गौरव हासिल कर चुके हैं। 26 फरवरी 2021 को उत्तरप्रदेश के हिन्दी संस्थान के वर्ष 2019 के सम्मानों पुरस्कारों पर निर्णय लेने के लिए गठित पुरस्कार समिति की बैठक में रविन्द्र की पुस्तक एवरेस्ट : सपनों की उड़ान – सिफर से…

उत्तम व्यक्ति कौन ? बुद्ध ने बताया

गौतम बुद्ध एक शहर में प्रवास कर रहे थे। उनके कुछ शिष्य भी उनके साथ थे । उनके शिष्य एक दिन शहर में घूमने निकले तो उस शहर के लोगों ने उन्हें बहुत बुरा भल्रा कहा – शिष्यों को बहुत बुरा ल्रगा और बे वापस लौट गये । गौतम बुद्ध ने जब देखा कि उनके सभी शिष्य बहुत क्रोध में दिख रहे हैं तो, उन्होंने पूछा – “क्या बात है आप सभी इतने तनाव में क्यूँ दिख रहे है।” तभी एक शिष्य क्रोध में बोला, “हमें यहाँ से तुरंत प्रस्थान…

जब बुद्ध ने युवक को सत्संग का महत्व समझाया : आदर्श कुमार

बुद्ध एक गाँव में ठहरे हुए थे। वे प्रतिदिन शाम को वहाँ पर सत्संग करते थे। भक्तों की भीड़ होती थी, क्योंकि उनके प्रवचनों से जीवन को सही दिशा बोध प्राप्त होता था। बुद्ध की वाणी में गजब का जादू था। उनके शब्द श्रोता के दिल में उतर जाते थे। एक युवक प्रतिदिन बुद्ध का प्रवचन सुनता था। एक दिन जब प्रवचन समाप्त हो गए, तो वह बुद्ध के पास गया और बोला, ‘महाराज! मैं काफी दिनों से आपके प्रवचन सुन रहा हूँ, किंतु यहाँ से जाने के बाद मैं…

जब हिटलर से पहली बार मिले नेता जी सुभाष बाबू , फिर क्या हुआ

अंग्रेजों के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जब-जब याद किया जाएगा एक नाम जरूर सबकी जुबां पर होगी. वह नाम है नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम. वहीं सुभाष चंद्र बोस जिन्होंने ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ का नारा बुलंद किया था. जिन्होंने देशवासियों से कहा था कि याद रखिए सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है. जिन्होंने कहा था कि सफलता हमेशा असफलता के स्तंभ पर खड़ी है. उनकी बातें, उनका संघर्ष और उनकी जिंदगी तीनों आज भी…