अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को मिडिल ईस्ट में वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी संघर्ष और तनाव की समाप्ति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते को लेकर एक समझौते पर काफी हद तक बातचीत पूरी हो चुकी है। इससे तीन महीने पुरान युद्ध के खत्म होने और एक बड़ा समझौता होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में तैयार हो रहे इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ…
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मुनस्यारी का सफर विकाश मुसाफिर के साथ
‘देवों की भूमि’ के रूप में प्रसिद्ध उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में फेमस है। यहां कुछ ऐसी चुनिंदा जगहे हैं जहां घूमने के लिए देश से ही नहीं बल्कि, विदेशों से भी सैलानी आते रहते हैं। उत्तराखंड के इन्हीं चुनिंदा जगहों में से एक है मुनस्यारी। मुनस्यार दो शब्दों ‘मुन’और ‘स्यार’ से मिलकर बना है। मुन का अर्थ है बर्फ (हिमकण जिसे स्थानीय भाषा में ‘मुण’ भी कहा जाता है) और स्यार का अर्थ है कीचड़। मतलब इस बर्फीले इलाके में बर्फ व कीचड़ के घालमेल की…
विश्व को युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए : आदर्श कुमार
आज हमारी सम्पूर्ण मानव सभ्यता को यह विचार करने की आवश्यकता है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कैसी दुनिया छोड़कर जा रहे हैं। जिस तरह की विविधता भरी मनोरम, सुरम्य और सुंदर प्राकृतिक संसाधनों से भरी दुनिया हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए छोड़ी थी, आज वह वैसी बिल्कुल नहीं रह गयी है। हमने पिछली एक-दो शताब्दी से प्राकृतिक संसाधनों का इतनी निर्ममता से दोहन किया है कि आज हमारी इस खूबसूरत दुनिया की हालत बहुत चिंताजनक है। हम सब और हमारी सरकारों इतनी स्वार्थी और स्वकेंद्रित हो गयीं…
गौरैया भी हमारे परिवार का एक सदस्य है: योगेंद्र कुमार
हर वर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। इस पहल की शुरुआत मोहम्मद दिलावर जो नेचर फॉरएवर सोसाइटी के संस्थापक हैं, ने 20 मार्च 2010 को की थी। इसका उद्देश्य तेजी से लुप्त होती गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना था। गौरैया के संरक्षण के उद्देश्य से तत्कालीन दिल्ली सरकार ने 14 अगस्त 2012 में गौरैया को दिल्ली का राजकीय पक्षी घोषित किया और बाद में 2013 में बिहार सरकार ने भी गौरैया को अपना राज्य पक्षी घोषित किया।गौरैया एक घरेलू पक्षी है जो…
एक क्लिक पर खत्म हो रही कमाई : आदर्श कुमार
सोशल मीडिया के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्मों की बाढ़ आ गई है, जो ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को झांसा देकर भारी रकम ठग लेते हैं। इसके कारण लोगों को अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई को गंवाना पड़ता है। ऑनलाइन की सुविधा जितनी बेहतर है, कई बार तमाम कमियों के चलते लोग फ्रॉड के शिकार भी हो जाते हैं। ऑनलाइन स्कैम बढ़ते ही जा रहे हैं। आज मोबाइल पर एक गलत क्लिक से आप अपनी पूरी जमापूंजी खो बैठते हैं। इसका सीधा सा मतलब आजकल ऑनलाइन फ्रॉड (साइबर…
सिर्फ दिल की बीमारियां नही है दिल के दर्द के कारण को जाने।
हमारे शरीर में दिल की संरचना काफी जटिल होती है और स्वस्थ रहने के लिए इसका स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। क्योंकि हमारे शरीर के विभिन्न अंगों को रक्त पहुंचाने का कार्य यही करता है। लेकिन लोगों के बीच इससे जुड़े कई मिथक प्रचलित हैं, आइए उन मिथकों और हकीकत के बारे में जानते हैं। इन वजहों से आप हो सकते हैं बहरे, कैसे करें बचाव मिथक: दिल की बीमारियों और ब्रेन स्ट्रोक में कोई संबंध नहीं है। हकीकत: दिल की बीमारियों और ब्रेन स्ट्रोक में गहरा संबंध है। कोरोनरी…
बच्चों की शिक्षा सुचारू बनाना सबसे ज्यादा जरूरी : आदर्श कुमार शाक्य
शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों के व्यक्तिगत और सामाजिक फायदे हैं। अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का अर्थ होता है भविष्य में अच्छी नौकरी, आमदनी और परिवार का बेहतर जीवनस्तर। वहीं सामाजिक फायदे यह हैं कि स्वस्थ और शिक्षित नागरिक देश के आर्थिक व चहुंमुखी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यानी शिक्षा व स्वास्थ्य मानव विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। इसीलिए दुनियाभर के विकसित व विकासशील देश दोनों क्षेत्रों में खुले दिल से पैसा खर्च करते हैं। कई देशों में सरकारी अस्पताल व स्कूल दोनों ही उच्चतम दर्जे के होते…
पर्यावरण प्रदूषण के नुकसान झेल रहे प्रदूषण करने वाले भी : डॉ. राम सिंह
हर साल 26 नवम्बर को विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाया जाता है। हमारे चारों ओर फैली सभी चीजें ही हमारा पर्यावरण हैं। पर्यावरण दो प्रकार का होता है: प्राकृतिक और मानवीय। आज हमारे प्राकृतिक पर्यावरण के सभी अंग: जल, वायु और मृदा बहुत प्रदूषित हो चुके हैं और इसका कारण मानवीय पर्यावरण का प्रदूषित होना है। व्यक्ति में नैतिकता की बहुत कमी हो गई है और वह सुविधा भोगी भी हो गया है। वह व्यक्तिगत लाभ के लिए पर्यावरण को हानि पहुंचा रहा है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण हम विभिन्न…
मौर्य वंश का इतिहास :प्रियदर्शी विनोद मौर्या
शाक्यों का एक समूह मोरों वाले जंगल मे रहता था। जहां के राजा विशालगुप्त थे। मोरों वाले जंगल मे रहने के कारण उन्हे मोरिय राजा कहा जाता था। उनके पुत्र सूर्यगुप्त मोर्य प्रतापी राजा हुए।जिन्होंने अपने सबसे बड़े पुत्र विष्णुगुप्त मोर्य को पढने विश्वविद्यालय भेज दिया था जो चाणक्य की डिग्री प्राप्त करके जब वापस आये तब तक उनके पिता राजा सूर्यगुप्त मोर्य एवं उनके परिवार की छल पूर्वक हत्या करके उनका सेनापति राजा बन गया था। माता मूरा को उनकी दासी बचाकर अपने घर ले गयी वहीं चन्द्रगुप्त का…
विश्व में परचम लहराता बौद्ध धर्म : डॉ दीक्षा कुशवाहा
बौद्ध धर्म विश्व के प्रमुख धर्मों में से एक है, और इसके संस्थापक गौतम बुद्ध (ईसवी पूर्व ५६३ – ईसवी पूर्व ४८३) थे। विश्व में करीब १९२ करोड़ (२८.७८%) लोक बौद्ध धर्म को माननेवाले है। दुसरे सर्वेक्षण के अनुसार १.६ अरब से १.८ अरब लोक (२३% से २५%) प्रतिनिधित्व बौद्ध करते है। बौद्ध धर्म एक धर्म और दर्शन है। संसार में ईसाई धर्म धर्म के बाद सबसे अधिक बौद्ध धर्म के ही अनुयायि पाये जाते। हालांकि कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार बौद्ध धर्म आबादी ४८.८ करोड़ से ५३.५ करोड़ ( विश्व…
संसद सत्र में हुए हंगामे से 166 घंटे बर्बाद, जनता के टैक्स के 248 करोड़ डूबे ? इसका जिम्मेदार कौन पक्ष या विपक्ष : आदर्श कुमार
ऑपरेशन सिंदूर से लेकर बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर हुए हंगामे के साथ संसद का मानसून सत्र बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव, अंतिम दो सप्ताह में थोक में निपटाए गए विधायी कामकाज, जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफे और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू करने के कारण चर्चा में रहा। हंगामे के कारण संसद के 166 घंटे बर्बाद हो गए। इससे जनता के टैक्स के करीब 248…
संविधान में किसान कहां/ संविधान में किसान को क्या मिला?
आजादी के लगभग 78 वर्ष बाद भी आज देश का किसान MSP( न्यूनतम समर्थन मूल्य) के लिए लड़ रहा है या आंदोलन कर रहा है पर आज भी देश का अन्नदाता कहें जाने वाले किसान सिर्फ न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए लड़ रहे हैं जबकि होना यह चाहिए कि देश के अन्नदाता को लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। जबकि यह कहां जाता है कि संविधान में सबके लिए कुछ ना कुछ है।संविधान हमें बोलने की आजादी देता है!संविधान हमें पढ़ने की आजादी देता है!संविधान हमें लिखने की आजादी देता है!संविधान बाल…
जल संकट से बचना है तो हर बूंद को सहेजना होगा : आदर्श कुमार
पंचतत्व जीवन के लिए आधार माने गए हैं। उसमें से एक तत्व जल भी है। अगर जल ही नहीं रहेगा तो जीवन की कल्पना कैसी और सृष्टि का निर्माण कैसा? जल का महत्व इस बात का भी परिचायक है कि दुनिया की बड़ी-बड़ी सभ्यताएँ और प्राचीन नगर नदियों के किनारे ही बसे और फले-फूले। लेकिन,आज विकास की अंधी दौड़ और विलासिता भरी जिंदगी में प्राकृतिक संसाधनों का तो जैसे कोई मोल नहीं रह गया है। पर्यावरण के साथ निरंतर खिलवाड़ का यह परिणाम हुआ कि आज दुनिया के अधिकांश देश…
जब एक छिपकली कर सकती है, तो हम क्यों नहीं।
जब एक छिपकली कर सकती है, तो हम क्यों नहीं। अपने मकान का नवीनीकरण करने के लिये, एक जापानी अपने मकान की दीवारों को तोड़ रहा था। जापान में लकड़ी की दीवारों के बीच ख़ाली जगह होती हैं, यानी दीवारें अंदर से पोली होती हैं। जब वह लकड़ी की दीवारों को चीर-तोड़ रहा था, तभी उसने देखा कि दीवार के अंदर की तरफ लकड़ी पर एक छिपकली, बाहर से उसके पैर पर ठुकी कील के कारण, एक ही जगह पर जमी पड़ी है। जब उसने यह दृश्य देखा तो उसे…
कौन किसकी सुध ले, आज भी गटर में मरते हैं लोग : आदर्श कुमार
हम किस युग में जी रहे हैं? मानव जीवन का क्या कोई मूल्य नहीं रह गया है? हमारा देश तरक्की कर रहा है। स्मार्ट सिटी बन रहे हैं। लेकिन हम हृदय विहीन होते जा रहे हैं। नगरों में हो रही सीवर सफाई के दौरान सफाई कर्मचारियों की मौतों पर हम मुँह बंद किये बैंठे हैं। इंसानों से सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करवाना बंद करने की सालों से उठ रही मांगों के बावजूद यह अमानवीय काम आज भी जारी है। इसी के साथ ही सीवर और सेप्टिक टैंकों में…
क्या आपको पता है कि आज आप किनके साथ अपना जन्मदिन शेयर कर रहे हैं?
धर्मगुरु दलाई लामा : धर्मगुरु दलाई लामा का जन्म आज ही के दिन साल 1935, 6 जुलाई को तिब्बत में हुआ था. इनका असली नाम ल्हामो दोंडुब है. जब ये दो साल के थे तभी इन्हें 13वें दलाई लामा थुबतेन ग्यात्सो का अवतार माना गया. और कुछ समय बाद 14वां दलाई लामा घोषित कर दिया गया. दलाई लामा एक मंगोलियाई पदवी है जिसका मतलब होता है ज्ञान का महासागर और दलाई लामा के वंशज करूणा, अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप माने जाते हैं। बोधिसत्व ऐसे ज्ञानी लोग…
बीमार होता देश और बेकाबू होती आबादी : आदर्श कुमार
आज भारत देश अनेक प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त नजर आ रहा है। बढ़ती आबादी के बोझ तले देश का विकास और स्वास्थ्य सेवाएं बौनी साबित हो रही हैं। देश में विकास की गति कम नहीं है, किंतु आबादी पर नियंत्रण न होने के कारण समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भारत की लगभग सभी समस्याओं के मूल में जनसंख्या विस्फोट प्रमुख कारण है। इससे लोगों की मानसिकता, शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन में गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। बढ़ती हुई आबादी के कारण…
पर्यावरण को बचाना है तो वृक्षारोपण है जरूरी : आदर्श कुमार (सम्पादक दस्तक मीडिया ग्रुप)
जंगल हों या वृक्ष इनका मानव जीवन में महत्त्वपूर्ण योगदान है। असलियत यह है कि वृक्ष दुनिया में जीवन का समर्थन करने वाली अहम और महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाहते हैं। यह ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। लेकिन आज जिस तेजी से समूची दुनिया में जंगल खत्म हो रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब जंगलों के अभाव में धरती पर पाई जाने वाली बहुमूल्य जैव सम्पदा बड़ी तादाद में नष्ट हो जाएगी जिसकी भरपाई की कल्पना ही बेमानी होगी।…
अकेला जीवन-रितेश मौर्य
अकेलाअकेले ही जीवन जीते हैंअपने जैसा कोई नहीं?मिलने को तो बहुत मिलेपर हम सा कोई मिला नहीं? किसी को हमसे धन चाहिएतो किसी को हमसे वादा,आजकल जो मिलते हैं उनकाकोई न कोई होता है नेक इरादा। झुण्ड में चलने से सड़कभरी भरी सी लगती है,पर जब धन खत्म होता है तोजिन्दगी अकेली सी लगती है। अंधेरे ही हमें बताता है कि….उजाला कितना ज़रूरी है,किसी से ज्यादा लगाव न करोदूरी का होना भी ज़रूरी है। अकेले चलने वाले कभीमुड़ के देखते नहीं है,किसी के जख्म पर नमक रखअपनी रोटी कभी सेंकते…
जब बुद्ध ने बताया पूजा का तरीका: आदर्श कुमार
राजगृह पथ पर जा रहे गौतम बुद्ध ने देखा, एक गृहस्थ भीगे वस्त्र पहने सभी दिशाओं को नमस्कार कर रहा था। बुद्ध ने पूछा, ”महाशय, इन छह दिशाओं की पूजा का क्या अर्थ है ? यह पूजा क्यों करनी चाहिए ?”गृहस्थ बोला, “यह तो मैं नहीं जानता।”बुद्ध ने कहा, “बिना जाने पूजा करने से क्या लाभ होगा ?”गृहस्थ ने कहा, ”भंते, आप ही कृपा करके बतलाएँ कि दिशाओं की पूजा क्यों करनी चाहिए ?” तथागत बोले, “ पूजा करने की दिशाएँ भिन्न हैं । माता-पिता और गृहपति पूर्व दिशा हैं,…
