फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 11 जून 2026 उत्तर प्रदेश सरकार के “बाल श्रम मुक्त उत्तर प्रदेश” संकल्प को साकार करने की दिशा में फर्रुखाबाद जनपद में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2027 तक जनपद को पूर्णतः बाल श्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत विकास खंड बढ़पुर की पांच और शमशाबाद की तीन ग्राम पंचायतों को बाल श्रम मुक्त घोषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
सहायक श्रमायुक्त ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने संबंधित ग्राम पंचायतों में ग्राम बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों की बैठकें आयोजित कर प्रस्ताव पारित कराए तथा ब्लॉक और जिला स्तर पर अनुमोदन प्राप्त किया। इन ग्राम पंचायतों की आगामी एक वर्ष तक नियमित निगरानी भी की जाएगी।
167 बच्चों को बाल श्रम से कराया गया मुक्त
श्रम विभाग द्वारा संचालित विशेष निरीक्षण अभियानों के दौरान 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2026 तक कुल 142 निरीक्षण किए गए, जिनमें 167 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। जिन प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिक पाए गए, उनके स्वामियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की गई।
जागरूकता अभियान में कई विभागों का सहयोग
बाल श्रम उन्मूलन अभियान में शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत राज, महिला एवं बाल विकास सहित कई विभाग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद के वार्ड सदस्यों के साथ विशेष गोष्ठी आयोजित की गई, वहीं उद्योग व्यापार मंडल के सहयोग से व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बाल श्रम न कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया।
विधायक और सामाजिक संगठनों ने की अपील
भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने क्षेत्रवासियों और व्यापारियों से बच्चों को श्रम में लगाने के बजाय शिक्षा से जोड़ने की अपील की। वहीं ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष कृष्ण दत्त द्विवेदी ने सभी ईंट भट्ठा संचालकों से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कार्य न लेने का अनुरोध किया।
12 जून को लखनऊ में होगा राज्य स्तरीय सम्मान समारोह
अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर 12 जून 2026 को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें बाल श्रम मुक्त घोषित क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा। फर्रुखाबाद से विभिन्न विभागों, व्यापार मंडलों, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और स्वयंसेवी संगठनों के लगभग 50 प्रतिनिधि कार्यक्रम में भाग लेंगे।
बाल श्रम कराने पर सख्त दंड का प्रावधान
सहायक श्रमायुक्त ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा संशोधित अधिनियम-2016 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रतिष्ठान में कार्य पर रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने वाले सेवायोजकों के खिलाफ आर्थिक दंड और कारावास की कार्रवाई की जाती है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक उद्योगों में नियोजित करना भी कानूनन अपराध है।
प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बना बाल श्रम उन्मूलन
जिलाधिकारी द्वारा जनपद स्तरीय टास्क फोर्स का पुनर्गठन किया गया है, जो लगातार निरीक्षण कर बाल श्रम की रोकथाम सुनिश्चित करेगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि कहीं भी बाल श्रमिक दिखाई देने पर इसकी सूचना तत्काल टोल फ्री नंबर 1098, 1800-102-7222 या PENCIL पोर्टल के माध्यम से दें, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, शिक्षा और बेहतर भविष्य मिल सके।
