फर्रुखाबाद:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनुपम दुबे समेत तीन की कुर्क संपत्तियां होंगी रिलीज

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 26 अगस्त 2026 गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई संपत्तियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डॉ. अनुपम दुबे समेत तीन लोगों को बड़ी राहत मिलने की स्थिति बन गई है। आदेश के बाद जिला प्रशासन को संबंधित संपत्तियों को रिलीज करने की आगे की कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इससे डॉ. अनुपम दुबे, अधिवक्ता शिवप्रताप सिंह उर्फ चीनू तथा स्वर्गीय संजीव पारिया के परिजनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

दरअसल, फतेहगढ़ कोतवाली में 13 फरवरी 2024 को गैंगस्टर एक्ट के तहत डॉ. अनुपम दुबे, अधिवक्ता शिवप्रताप सिंह उर्फ चीनू और स्वर्गीय संजीव पारिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे के बाद पुलिस-प्रशासन की ओर से आरोपितों की संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों के तहत कुर्क किया गया था। इन संपत्तियों पर प्रशासक नियुक्त किए जाने संबंधी बोर्ड भी लगाए गए थे।

पुलिस के मुताबिक, डॉ. अनुपम दुबे की करीब 9.83 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई थी। वहीं अधिवक्ता शिवप्रताप सिंह उर्फ चीनू की ओर से बताया गया कि उनके प्लॉट, पांच बसें, चार ट्रैक्टर और चार बाइक समेत करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई थीं।

वहीं स्वर्गीय संजीव पारिया की संपत्तियों की कुर्की का आंकड़ा सबसे अधिक बताया गया था। इनमें फतेहगढ़ के लोको रोड स्थित संपत्तियां, कमालगंज और कन्नौज में स्थित स्कूल, सिविल लाइंस के प्लॉट, इमामबाड़े के पास स्थित प्लॉट व दुकानें तथा गल्ला मंडी की दुकानें शामिल थीं। इनकी कुल कीमत करीब 86 करोड़ रुपये बताई गई थी। हालांकि, उनके स्कूलों को प्रशासन पहले ही कुर्की की कार्रवाई से मुक्त कर चुका है।

इस मामले में 17 अगस्त को हाईकोर्ट से भी राहत मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुर्क संपत्तियों को रिलीज करने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़नी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित पक्षों और स्वर्गीय संजीव पारिया के परिजनों की नजर अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। प्रशासन को यह तय करना होगा कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कुर्क संपत्तियों को किस प्रक्रिया के तहत और कितनी अवधि में रिलीज किया जाता है।

गैंगस्टर एक्ट के तहत करोड़ों रुपये की संपत्तियों की कुर्की और अब उन्हें रिलीज किए जाने की स्थिति ने पुलिस-प्रशासन की पूर्व कार्रवाई पर भी चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और आदेश के अनुपालन पर टिकी हैं।

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