पटना:(द दस्तक 24 न्यूज़) 04 मार्च 2026 होली के अवसर पर राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर उस दौर की चर्चा तेज हो गई, जब बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सत्ता और जनता के बीच की दूरी को मिटाते हुए होली का पर्व आम लोगों के साथ मनाया था।
कहा जाता है कि आमतौर पर मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सुरक्षा कारणों से आवास के दरवाज़े आम जनता के लिए सीमित कर दिए जाते हैं, लेकिन लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में होली के दिन मुख्यमंत्री आवास के दरवाज़े जनता के लिए खुले रहते थे। बड़ी संख्या में समर्थक, कार्यकर्ता और आम लोग वहां पहुंचते और मुख्यमंत्री के साथ रंग-गुलाल खेलते थे।
चर्चाओं के अनुसार, एक होली के अवसर पर उनके कपड़े किसी मंत्री ने नहीं, बल्कि उनके बचपन के एक साधारण मित्र ने फाड़ दिए थे, जो गोपालगंज से जुड़े बताए जाते हैं। इस घटना को उनके समर्थक आज भी उनके सरल और मिलनसार स्वभाव की मिसाल के रूप में याद करते हैं।
इतना ही नहीं, उस समय मुख्यमंत्री आवास पर पारंपरिक अंदाज में ताड़ी की भी व्यवस्था होने की बात कही जाती है, जिससे यह संदेश दिया गया कि यह उत्सव पूरी तरह से आम जनता के साथ, उनके ही अंदाज में मनाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने कार्यकाल में खुद को ‘जनता के नेता’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश की और इस तरह के आयोजनों ने उनकी छवि को और मजबूत किया।
होली जैसे त्योहार पर सत्ता और आमजन के बीच की दूरी को कम करने की यह शैली आज भी राजनीतिक चर्चाओं में उदाहरण के रूप में सामने आती है।
