गोला गोकर्णनाथ : (द दस्तक 24 न्यूज) राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्री कृष्ण वर्मा ने आरोप लगाया है कि गन्ना किसानों के हित में बनाए गए केंद्रीय गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 को समाप्त कर सरकार चीनी मिलों के हित में और गन्ना किसानों को हानि पहुंचने के लिए नया आदेश बनाना चाहती है जो किसानों को स्वीकार नहीं है जिसको लेकर राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह एवं केंद्रीय उपभोक्ता एवं खाद्य सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी भारत सरकार को 6 सूत्रीय मांग ज्ञापन भेजकर मांग की है कि गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 में 14 दिन में गन्ना भुगतान न होने पर 15% ब्याज दिए जाने का प्राविधान है लेकिन अब तक सरकार गन्ना किसानों को ब्याज नहीं दिला सकी है इसमें प्राविधान किया जाए कि ब्याज सहित भुगतान न देने वाली चीनी मिल के मालिकों पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए। पुराने आदेश में चीनी मिल के 15 किलोमीटर के दायरे में नई चीनी मिल या खंडसारी उद्योग स्थापित न किये जाने का प्राविधान है जिसे संशोधित कर 25 किलोमीटर दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव चीनी मिलों के पक्ष में और गन्ना किसानों के लिए अहितकारी है क्योंकि इस प्रस्ताव से गन्ना किसानों को गन्ना भुगतान न करने वाली संबंधित चीनी मिल में गन्ना बेचने के लिए विवश होना पड़ेगा क्योंकि 25 किलोमीटर के दायरे में कोई खंडसारी उद्योग ही नहीं मिलेगा। संगठन ने प्रस्ताव किया है कि किसानों को किसी भी चीनी मिल में अपना सट्टा बनवाने और गन्ना आपूर्ति करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। किसान नेता ने सरकार के इस नए प्रस्ताव पर हैरानी जताई जिसमें सहकारी गन्ना विकास समितियां के जिम्मे ही खंडसारी उद्योग किए जाने का प्रस्ताव किया है जिसमें यह लिखा गया है कि खंडसारी उद्योग सरकार द्वारा निर्धारित गन्ना मूल्य से अधिक मूल्य नहीं दे सकेंगे यह प्रस्ताव फिर एक बार खंडसारी उद्योगों को समाप्त करने का प्रयास है। संगठन ने प्रस्ताव किया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह द्वारा लागू कराए गए चीनी उपक्रम प्रबंध ग्रहण अधिनियम 1978 को पुनः लागू किया जाए जिसे मोदी सरकार ने वापस ले लिया था। संगठन का प्रस्ताव है कि जो चीनी मिल गन्ना किसानों का समय से भुगतान नहीं करती हैं उन चीनी मिलों की होने वाली तालाबंदी पर सरकार प्रतिबंध लगाए और अपने आधिपत्य मे ले और गन्ना किसानों के हित में चीनी मिल चलाए। किसान नेता ने इस पर हैरानी जताई कि किसानों से संबंधित गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 को समाप्त कर कर केंद्र सरकार नया आदेश लागू करना चाहती है जिसके लिए चीनी मिलों से तो राय मांगी गई लेकिन किसान संगठनों से कोई राय तक नहीं मांगी गई है। इसी प्रकार चीनी उपक्रम प्रबंध ग्रहण अधिनियम 1978 को बिना किसानों की राय लिए वापस ले लिया गया था।
संगठन ने ज्ञापन भेजकर अनुरोध किया है कि देश के गन्ना किसानों के हित में हमारे प्रस्ताव को शामिल किया जाए अन्यथा अपने हित की रक्षा के लिए किसान देशव्यापी आंदोलन के लिए विवश होंगे जिसकी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
लखीमपुर खीरी : राकिशसं ने गन्ना किसानों का रखा पक्ष, कृषि मंत्री भारत सरकार को भेजा ज्ञापन
