फर्रुखाबाद:ठंड और बढ़ती नमी में फसलों की सुरक्षा जरूरी,आलू व सरसों के लिए कृषि विभाग की एडवाइजरी

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 18 दिसंबर 2025 वर्तमान समय में वायुमण्डलीय तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। तापमान कम होने और आर्द्रता बढ़ने के कारण खेतों में बोई गई फसलों में फंफूदीजनित रोगों तथा कीटों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। मौसम में उतार-चढ़ाव की स्थिति में माहू, थ्रिप्स जैसे कीट तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की नियमित निगरानी एवं समय पर उपचार करना अत्यंत आवश्यक है।

कृषि विभाग के अनुसार इस समय आलू और सरसों की फसलें रोग एवं कीटों से सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका रहती है। इन फसलों की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा निम्नलिखित सुझाव जारी किए गए हैं—

आलू की फसल

आलू की फसल में माहू एवं थ्रिप्स कीटों के नियंत्रण हेतु एजाडिरैक्टिन (नीम ऑयल) 0.15 प्रतिशत ईसी की 2 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर, 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी की 1.5 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 0.5 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी का प्रयोग किया जा सकता है।

इस समय आलू की फसल में अगेती व पिछेती झुलसा रोग का खतरा अधिक रहता है। अगेती झुलसा में पत्तियों पर कत्थई भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जबकि पिछेती झुलसा में पत्तियों व तनों पर भूरे धब्बों के साथ निचली सतह पर रूई जैसी फंगस जम जाती है। यह रोग तेजी से फैलता है, इसलिए तत्काल नियंत्रण आवश्यक है।

इन रोगों के नियंत्रण हेतु मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत + मैंकोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा जिनेव 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। पिछेती झुलसा के तीव्र प्रकोप की स्थिति में मेटालेक्सिल 4 प्रतिशत + मैंकोजेब 64 प्रतिशत की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी या सायमोक्सानिल 8 प्रतिशत + मैंकोजेब 64 प्रतिशत की 3 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी का प्रयोग किया जा सकता है।

सरसों की फसलP

सरसों की फसल में माहू कीट के नियंत्रण हेतु एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी (नीम ऑयल) की 2.5 लीटर मात्रा अथवा डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी की 1 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर, 600 से 750 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

सरसों में प्रमुख रूप से आल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग का प्रकोप देखा जाता है, जिसमें पत्तियों और फलियों पर गहरे कत्थई रंग के गोल छल्लेदार धब्बे बनते हैं। अधिक प्रकोप होने पर पूरी पत्ती झुलस सकती है। इसके नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी अथवा जिनेव 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर, 600 से 750 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

किसानों के लिए सलाह

किसान भाई किसी भी फसल में कीट एवं रोग नियंत्रण संबंधी अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी, प्राविधिक सहायक अथवा विकास खण्ड स्तर पर स्थित राजकीय कृषि रक्षा इकाई से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त पीसीएसआरएस के मोबाइल व्हाट्सएप नंबर 9452247111 एवं 9452257111 पर फोटो भेजकर भी समस्या का समाधान प्राप्त किया जा सकता है। किसान एनपीएसएस एप डाउनलोड कर अपनी समस्या ऑनलाइन भी दर्ज करा सकते हैं।