फर्रुखाबाद:बाढ़ राहत की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद, 52 बाढ़ चौकियां और 24 शरणालय सक्रिय

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 19 अगस्त 2026 जनपद में गंगा और रामगंगा नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर पूरी तरह सतर्क है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एवं नोडल अधिकारी बाढ़ राहत ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा एवं खाद्य व्यवस्था के लिए सभी संबंधित विभागों को सक्रिय रखा गया है।

गंगा-रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे

19 अगस्त 2026 को नरोरा बैराज से गंगा नदी में 1,15,137 क्यूसेक पानी पास हुआ। पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर है। वहीं रामगंगा नदी में 75,445 क्यूसेक पानी पास हुआ और रामगंगा सेतु पर जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहा। प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों में फर्रुखाबाद को अतिसंवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है।

वर्तमान में तहसील सदर, अमृतपुर और कायमगंज के कुल 63 गांवों में आबादी एवं कृषि क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हैं।

52 बाढ़ चौकियां और 24 बाढ़ शरणालय संचालित

बाढ़ प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए जनपद में 52 बाढ़ चौकियां और 24 अस्थाई बाढ़ शरणालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें सदर तहसील में 5, कायमगंज में 15 और अमृतपुर में 33 बाढ़ चौकियां हैं। इसी प्रकार सदर में 5, कायमगंज में 6 और अमृतपुर में 13 बाढ़ शरणालय संचालित हैं।

बाढ़ प्रभावित तीनों तहसीलों में एक-एक मॉडल शरणालय भी स्थापित किया गया है। यहां बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, मनोरंजन कक्ष और खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

खोज एवं बचाव कार्यों के लिए 191 निजी नाव एवं नाविक तथा 53 गोताखोर सेफ्टी किट के साथ उपलब्ध हैं। तहसीलों में लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग, सर्च लाइट, सेफ्टी हेलमेट, रेनकोट, मेगाफोन, रस्सा सहित अन्य आवश्यक संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए गए हैं।

24 घंटे सक्रिय बाढ़ नियंत्रण कक्ष

जिला प्रशासन द्वारा 1 जून 2026 से कलेक्ट्रेट फतेहगढ़ के कक्ष संख्या 27, जिलाधिकारी कैंप कार्यालय तथा सिंचाई विभाग नलकूप कॉलोनी में 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित किए जा रहे हैं। यहां कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है।

कलेक्ट्रेट बाढ़ नियंत्रण कक्ष के टोल फ्री नंबर 1077, दूरभाष 05692-235077 एवं मोबाइल 94544-416457 पर संपर्क किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने लगाए 144 मेडिकल कैंप

बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 17 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। अब तक 144 मेडिकल कैंप लगाए जा चुके हैं, जिनमें 8,073 लोगों का उपचार किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10,413 ओआरएस पैकेट और 9,063 क्लोरीन टैबलेट वितरित किए गए हैं। पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम एवं अन्य आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का भी चिन्हांकन किया गया है।

3,273 पशुओं का उपचार, 7,237 का टीकाकरण

पशु चिकित्सा विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 6 पशु चिकित्सा टीमें और 14 अस्थाई पशु शरणालय स्थापित किए हैं। अब तक 54 पशु शिविरों में 3,273 पशुओं का उपचार और 7,237 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। पशु राहत शिविरों में 120 कुंतल भूसा भी वितरित किया जा चुका है।

बच्चों की पढ़ाई का भी रखा जा रहा ध्यान

बाढ़ शरणालयों में रह रहे बच्चों की शिक्षा को प्रभावित न होने देने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा नियमित कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। पढ़ाई के साथ नैतिक शिक्षा, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के मानसिक, शैक्षिक एवं सामाजिक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

कृषि फसलों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशन में कृषि विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को जलभराव सहनशील धान की प्रजाति आईआर-64 सब-1 आदि उपलब्ध कराई गई है। यह प्रजाति 14 दिन तक जलभराव की स्थिति में भी बाढ़ का पानी उतरने के बाद पुनः सामान्य हो सकती है। इस प्रजाति से लगभग 200 एकड़ क्षेत्र आच्छादित है।

सिंचाई विभाग द्वारा गंगा एवं रामगंगा नदी के कटाव से सुरक्षा के लिए 12.15 करोड़ रुपये की लागत से चार परियोजनाओं के तहत परकोपाइन एवं स्क्रीन संबंधी कार्य कराए गए हैं।

10,621 परिवारों को राहत सामग्री, 661 लोग शरणालयों में

बाढ़ प्रभावित ग्रामों में 10,621 परिवारों को राहत सामग्री एवं सूखा खाद्यान्न पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।

अब तक 661 लोगों को विस्थापित कर बाढ़ शरणालयों में रखा गया है, जहां उन्हें सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 7,939 पके भोजन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

50,775 आबादी और 2,881.8 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित

जिला प्रशासन के अनुसार गंगा नदी के जलस्तर से जनपद में कुल 50,775 आबादी प्रभावित हुई है। इसमें सदर तहसील के 12 गांवों की 16,915 आबादी, कायमगंज के 21 गांवों की आबादी तथा अमृतपुर के 30 गांवों की 21,160 आबादी शामिल है।

बाढ़ से अब तक 2,881.8 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। पानी उतरने के बाद राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा फसलों का सर्वे कराया जाएगा और पात्र किसानों को कृषि निवेश अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

कटाव प्रभावित परिवारों को आवासीय पट्टे

बाढ़ के पानी के कटाव से जिन ग्रामीणों के आशियाने प्रभावित हुए हैं, उन्हें आवासीय पट्टा दिए जाने के लिए संबंधित तहसीलों से प्रस्तावित सूची तैयार की जा रही है। सदर तहसील के ग्राम दिलीप की मड़ैया के 25 परिवारों को आवासीय पट्टे वितरित किए गए हैं, जबकि इनमें से 21 परिवारों के खातों में पट्टे की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।

बाढ़ से पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त 21 परिवारों को पक्के मकान के लिए 25.20 लाख रुपये गृह अनुदान के रूप में वितरित किए जा चुके हैं।

मॉकड्रिल और स्कूल सेफ्टी कार्यक्रम भी हुए

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में एनडीआरएफ, फ्लड पीएसी, राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, सिंचाई सहित अन्य विभागों के समन्वय से 2 मॉकड्रिल, बाढ़ राहत चौपाल और 19 स्कूल सेफ्टी कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशन में जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा और सहायता के लिए लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर रहा है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रखते हुए प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखने की बात कही है।

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