फर्रुखाबाद:श्रेणी-62 की भूमि को निजी बताने का आरोप, शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से की निष्पक्ष जांच की मांग

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 30 मई 2026 उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच अमृतपुर तहसील का एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्राम पंचायत भरखा में विद्यालय भवन के लिए सुरक्षित सरकारी भूमि (श्रेणी-62) पर कथित अवैध कब्जे और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि गांव में स्थित श्रेणी-62 की भूमि, जो सार्वजनिक उपयोग और विद्यालय भवन के लिए आरक्षित है, पर वर्षों से एक निजी विद्यालय संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन इस भूमि का उपयोग कर भारी भरकम डोनेशन वसूल रहा है, जबकि भूमि का स्वामित्व सरकारी अभिलेखों में सार्वजनिक श्रेणी में दर्ज है।

1980 में खारिज हो चुकी थी निजी आवंटन की मांग

उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वर्ष 1980 में विद्यालय के तत्कालीन प्रबंधक द्वारा इस भूमि को निजी संस्था के नाम आवंटित किए जाने की मांग की गई थी। उस समय चकबंदी अधिकारी (सीओ) राजेपुर ने इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद वर्तमान में उसी भूमि पर निजी विद्यालय संचालित होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नायब तहसीलदार और लेखपाल पर संरक्षण देने के आरोप

शिकायतकर्ता ने नायब तहसीलदार अभिषेक यादव एवं क्षेत्रीय लेखपाल पवन यादव पर आरोप लगाते हुए कहा है कि दोनों अधिकारियों ने बिना पर्याप्त अभिलेखीय जांच के भूमि को सरकारी दायरे से बाहर बताने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि यदि भूमि वास्तव में श्रेणी-62 में दर्ज है तो उसे सरकारी संपत्ति मानते हुए कब्जा मुक्त कराया जाना चाहिए।

एडीएम के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं

मामले की शिकायत 30 अप्रैल 2026 को अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार से की गई थी। शिकायत के बाद जांच के लिए चार सदस्यीय मजिस्ट्रेट टीम गठित की गई थी। हालांकि लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है।

शिकायतकर्ता ने उठाए कई सवाल

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूछा है कि—यदि भूमि सरकारी नहीं है तो उसे सार्वजनिक श्रेणी (श्रेणी-62) में क्यों दर्ज किया गया? किस शासनादेश के आधार पर इसे सरकारी भूमि नहीं माना जा रहा है? बिना किसी लीज, पट्टे या वैध आवंटन के निजी विद्यालय को भूमि का उपयोग करने की अनुमति किसने दी? यदि विद्यालय भवन की भूमि निजी मानी जा रही है तो क्या अन्य सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी वाली भूमियां भी निजी घोषित कर दी जाएंगी?

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर अब स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ता की निगाहें जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि भूमि वास्तव में सरकारी है तो उसे कब्जा मुक्त कराकर सार्वजनिक उपयोग में लाया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

फिलहाल जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। मामले की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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