फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 10 जून 2026 जनपद में आगामी मोहर्रम (25 एवं 26 जून 2026), चेहल्लुम (4 अगस्त 2026) तथा विभिन्न परीक्षाओं के शांतिपूर्ण एवं सकुशल आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट डॉ. अंकुर लाठर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)-2023 की धारा-163 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर 6 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जनपद में साम्प्रदायिक सौहार्द, कानून-व्यवस्था एवं जनशांति बनाए रखने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाए गए हैं। आदेश के तहत सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, बिना अनुमति सभा या जुलूस आयोजित करने पर रोक रहेगी। हालांकि विवाह, अंतिम संस्कार एवं धार्मिक कार्यक्रमों को इस प्रतिबंध से छूट प्रदान की गई है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राजकीय अधिकारियों-कर्मचारियों तथा सिख धर्म के अनुयायियों को छोड़कर कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थलों पर हथियार, आग्नेयास्त्र अथवा विस्फोटक सामग्री लेकर नहीं चल सकेगा और न ही ऐसी सामग्री का भंडारण कर सकेगा।
सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी व्यक्ति द्वारा अफवाह फैलाने, भड़काऊ संदेश प्रसारित करने अथवा ऐसी राजनीतिक टिप्पणियां साझा करने पर प्रतिबंध रहेगा, जिससे सामाजिक या साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न होने की आशंका हो। फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने को भी दंडनीय कृत्य बताते हुए स्थानीय नियमों के अनुसार जुर्माना लगाए जाने की चेतावनी दी है। इसके अतिरिक्त किसी भी समुदाय के विरुद्ध टिप्पणी, धरना-प्रदर्शन, जुलूस तथा अफवाह फैलाने की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं नकलविहीन बनाने के लिए भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। नकल कराने वाले व्यक्तियों पर निगरानी रखकर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा परीक्षा केंद्रों के आसपास प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला मजिस्ट्रेट डॉ. अंकुर लाठर ने सभी नागरिकों से आदेशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-223 के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना जाएगा तथा दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
