फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 30 मार्च 2026 जनपद में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें और अन्य शैक्षिक सामग्री खरीदने का दबाव बनाने के खिलाफ सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। बड़ी संख्या में अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर स्कूलों की कथित मनमानी के खिलाफ आवाज बुलंद की।
फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा के आह्वान पर आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालय अभिभावकों को प्राइवेट पब्लिकेशंस की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
छह सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 26 मार्च को प्रशासन को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर लोगों ने कलेक्ट्रेट में धरना देने का निर्णय लिया।
धरने के दौरान “प्राइवेट स्कूलों की लूट बंद करो” और “भ्रष्ट स्कूल प्रशासन मुर्दाबाद” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा।
महिलाओं और व्यापार मंडल की सक्रिय भागीदारी
इस विरोध प्रदर्शन में उद्योग व्यापार मंडल और महिला सभा की जिला अध्यक्ष सोनी शुक्ला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। सभी ने एक स्वर में स्कूलों द्वारा की जा रही कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग की।
प्रशासन से वार्ता, डीएम ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से पहले सिटी मजिस्ट्रेट और फिर अपर जिलाधिकारी को वार्ता के लिए भेजा गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनसे बातचीत करने से इंकार कर दिया।
बाद में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी स्वयं मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से संवाद किया। उन्होंने ज्ञापन प्राप्त करते हुए आश्वासन दिया कि जल्द ही आदेश जारी कर किसी भी विद्यालय को प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें लागू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
डीएम ने अभिभावकों से अपील की कि वे अनावश्यक किताबें न खरीदें और यदि कोई विद्यालय दबाव बनाता है तो इसकी शिकायत प्रशासन को करें। उन्होंने सख्त कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया।
डीआईओएस का कड़ा रुख: जबरन खरीदारी कराना गैरकानूनी
इसी बीच जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय ने भी स्कूलों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाया है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी छात्र या अभिभावक को कॉपी, किताबें, ड्रेस, जूते या अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान या विद्यालय से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसा करना पूरी तरह अवैध है।
एनसीईआरटी किताबों को ही अनिवार्य करने के निर्देश
विभाग को यह शिकायत भी मिली है कि कुछ विद्यालय एनसीईआरटी की पुस्तकों को नजरअंदाज कर निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ा रहे हैं। इस पर विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे केवल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को ही लागू करें।
शुल्क विनियमन अधिनियम का पालन जरूरी
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के तहत स्कूलों को शुल्क निर्धारण और प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों से शिकायत करने की अपील
प्रशासन और शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि किसी भी विद्यालय द्वारा जबरन सामान खरीदने या अनियमित शुल्क वसूली का दबाव बनाया जाता है, तो इसकी शिकायत तत्काल जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में दर्ज कराएं।
धरना समाप्त, लेकिन चेतावनी जारी
जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त कर दिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
निष्कर्ष:
फर्रुखाबाद में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ उठी यह आवाज शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन अपने आश्वासनों को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू करता है।
