विश्व को युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए : आदर्श कुमार

आज हमारी सम्पूर्ण मानव सभ्यता को यह विचार करने की आवश्यकता है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कैसी दुनिया छोड़कर जा रहे हैं। जिस तरह की विविधता भरी मनोरम, सुरम्य और सुंदर प्राकृतिक संसाधनों से भरी दुनिया हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए छोड़ी थी, आज वह वैसी बिल्कुल नहीं रह गयी है। हमने पिछली एक-दो शताब्दी से प्राकृतिक संसाधनों का इतनी निर्ममता से दोहन किया है कि आज हमारी इस खूबसूरत दुनिया की हालत बहुत चिंताजनक है। हम सब और हमारी सरकारों इतनी स्वार्थी और स्वकेंद्रित हो गयीं हैं कि हमने अपने खुद के लिए और उद्योगपतियों व पूंजीपतियों के उपभोग और विलासितापूर्ण जीवन जीने के लिए प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट की छूट दे दी है।

आज दुनिया में आपसी द्वेष के चलते युद्ध हो रहे हैं , लोग लहू के प्यासे हैं । हर तरफ मारकाट हो रही है । ऐसे में जरूरी है लोग शांति के पथ पर चलें । यहां समझना जरूरी है की भगवान बुद्ध का मार्ग विश्व शांति का मार्ग है। यह मार्ग हमें मन की शांति, करूणा, प्रेम, अपनत्व और विश्व बंधुत्व की ओर ले जाता है। उनका संदेश दुनिया में शांति और सद्भाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम है। बुद्ध का लोकहितकारी चिन्तन एवं कर्म कालजयी, सार्वभौमिक, सार्वकालिक एवं सार्वदैशिक है और युग-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा, ऐसे में इसे अपनाने से विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। गौतम बुद्ध एक प्रकाशस्तंभ हैं, जिसका प्रकाश केवल बाहरी दुनिया को ही नहीं, बल्कि भीतरी दुनिया को भी आलोकिक करता है।

मौजूदा समय में दुनिया के कई देश बुद्ध के दिखाए रास्ते पर चलकर उनके सिद्धांतों को अपनाकर सफलता की नई ऊंचाई छू रहे हैं। बुद्ध का मानना था कि अति किसी बात की अच्छी नहीं होती है। मध्यम मार्ग ही ठीक होता है। बुद्ध ने कहा है -वैर से वैर कभी नहीं मिटता। अवैर (मैत्री) से ही वैर मिटता है-यही सनातन नियम है। आज हम जो लड़ाइयां देख रहे हैं, जितने भी देश आपस में लड़ाई लड़ रहे हैं उन्हें भगवान बुद्ध के उसूलों की जरूरत है।

सामााजिक क्रांति के संदर्भ में उनका जो अवदान है, उसे उजागर करना वर्तमान युग की बड़ी अपेक्षा है। ऐसा करके ही हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकेंगे। बुद्ध ने समतामूलक समाज का उपदेश दिया। जहां राग, द्वेष होता है, वहां विषमता पनपती है। जरूरत है उन्नत एवं संतुलित समाज निर्माण के लिए बुद्ध के उपदेशों को जीवन में ढालने की। ‘धम्मपद’ के बुद्ध वग्ग में कहा गया है कि सभी तरह के पापों का न करना, पुण्य कर्मों का संचय करना और अपने चित्त को परिशुद्ध रखना, यही बुद्धों की शिक्षा है। भगवान बुद्ध के विचारों की आज के समय में बहुत अधिक आवश्यकता है। आज दुनिया को युद्ध की नहीं, बुद्ध की जरुरत है।