Saturday, 24 October 2026 | 2:05 PM
भारत

गया:फल्गु का जीर्णोद्धार, पर्यावरण और भू जल को लेकर समाहरणालय में बैठक

Share:
गया:फल्गु का जीर्णोद्धार, पर्यावरण और भू जल को लेकर समाहरणालय में बैठक
गया: फल्गु नदी के जीर्णोद्धार, पर्यावरण संरक्षण एवं भूजल स्तर में सुधार के उद्देश्य से आज समाहरणालय सभागार में जिला पदाधिकारी, गया श्री शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में वन विभाग, जल संसाधन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में फल्गु नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने, नदी में जल का ठहराव सुनिश्चित करने तथा नदी के आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।
        बैठक में बताया गया कि भारत सरकार के जल शक्ति मिशन के माध्यम से आईआईटी रुड़की द्वारा झारखंड के लावा-लौंग, चतरा स्थित फल्गु नदी के उद्गम क्षेत्र से लेकर गया जिला होते हुए जहानाबाद सहित आगे के क्षेत्रों तक नदी का विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में नदी के बदलते स्वरूप, जल के ठहराव में कमी तथा नदी के समग्र जीर्णोद्धार की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
      जिला पदाधिकारी ने जिला वन पदाधिकारी एवं उप विकास आयुक्त को निर्देश दिया कि गया जिले में पड़ने वाले फल्गु नदी के संपूर्ण क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण कराते हुए नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, हरित क्षेत्र का विस्तार होगा तथा गया जिले को हरा-भरा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी।
       फल्गु नदी के किनारे पड़ने वाले सभी संबंधित अंचलों के अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी एवं वन विभाग के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से नदी के किनारों का भौतिक निरीक्षण करें तथा पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थलों को चिह्नित करें। इसके आधार पर पौधरोपण की प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
     बैठक में नदी एवं आसपास के आवासीय क्षेत्रों में लगातार गिरते जलस्तर पर समीक्षा की गई। भूजल स्तर में सुधार तथा वर्षा जल को धरती के भीतर पहुंचाने के उद्देश्य से फल्गु नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर की चौड़ाई वाले क्षेत्र में जल पुनर्भरण की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
     जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि गया, बोधगया एवं डोभी क्षेत्र में कुल 123 खराब (डिफंक्ट) बोरवेल चिह्नित किए गए हैं। जिला पदाधिकारी ने इन सभी बोरवेल को वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में उपयोग में लाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया, ताकि वर्षा जल का भूजल स्तर बढ़ाने में उपयोग किया जा सके।
जिला पदाधिकारी ने जिला पंचायती राज पदाधिकारी को निर्देश दिया कि नदी के किनारे स्थित सभी संबंधित पंचायतों के माध्यम से पंचायत स्तर पर खराब बोरवेल को चिह्नित कराया जाए तथा उन्हें वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए।
    जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि फल्गु नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के दायरे में जिन स्थानों पर जलजमाव की समस्या होती है, वहां सोख्ता निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षा जल का समुचित प्रबंधन एवं भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित किया जा सके।
       इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में स्थित बड़े सरकारी भवनों एवं प्रमुख प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकना तथा उसका अधिकतम उपयोग भूजल स्तर में सुधार के लिए करना है।
     जिला पदाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि फल्गु नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित सभी आहर, पोखर एवं पइन का भौतिक निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन करें। साथ ही, नदी एवं आसपास के क्षेत्रों को जल संरक्षण की दृष्टि से लाभ पहुंचाने और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए जहां अतिरिक्त आहर, पोखर एवं पइन के निर्माण अथवा पुनर्जीवन की आवश्यकता है, उसकी पहचान कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
      बैठक में स्पष्ट किया गया कि फल्गु नदी के जीर्णोद्धार के लिए नदी संरक्षण, पौधरोपण, वर्षा जल संचयन, खराब बोरवेल के पुनः उपयोग तथा पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण से संबंधित कार्यों को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
       बैठक में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, गया, नदी संरक्षण से जुड़े समाजसेवी श्री संजय सज्जन सहित जल संसाधन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।