वोट आखिर है किसके लिए? गरीब की राजनीतिक ताकत पर मंडराता खतरा
लोकतंत्र में वोट केवल सरकार चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि आम नागरिक की राजनीतिक ताकत भी है। अमीर और प्रभावशाली लोगों के पास सत्ता तक पहुँचने के अनेक रास्ते होते हैं, जबकि गरीब, प्रवासी मजदूर, झुग्गी बस्तियों में रहने वाले और किरायेदार अपनी आवाज़ पहुँचाने के लिए मतदान पर निर्भर रहते हैं। मतदाता सूची से नाम कटने का सवाल इसलिए केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक समानता, नागरिक अधिकारों और लोकतंत्र में भागीदारी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यह लेख सवाल उठाता है कि अगर सबसे कमजोर नागरिक का वोट ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र में उसकी आवाज़ कौन सुनेगा?