आज का राशिफल: नागरिक का भाग्य आज भी किसी और की मेज़ पर है!
अगर आज अख़बार की जगह राशिफल पढ़ा जाए, तो देश की असली तस्वीर कैसी दिखाई देगी? मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयोग, किसान, दिल्ली, सर्वोच्च न्यायालय, इसरो और आम नागरिक की अलग-अलग राशियों के बहाने यह व्यंग्य भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा विडंबनाओं पर सवाल उठाता है। तेरह करोड़ मतदाताओं के नामों का विवाद, किसानों की आर्थिक चुनौतियाँ, प्रदूषण, सुरक्षा व्यवस्था और संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दों को व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत करता यह लेख अंततः एक बुनियादी सवाल पूछता है—क्या नागरिक अपना भाग्य दूसरों के भरोसे छोड़ देगा या अपने अधिकारों के लिए जागरूक होगा?