Thursday, 22 October 2026 | 1:26 PM
संपादकीय

ब्रह्मांड में हरा-सफेद बौना तारा और गुलाबी तारे का रहस्य: क्या विज्ञान बदल रहा है हमारी सोच?

ब्रह्मांड में तारों के रंग और उनके जीवनचक्र को लेकर विज्ञान लगातार नई जानकारियाँ सामने ला रहा है। सफेद बौने तारे किसी तारे के विकास की अंतिम अवस्था का अवशेष होते हैं। तारों का रंग उनके तापमान और प्रकाश के गुणों से जुड़ा है। यह लेख ब्रह्मांड की विविधता, तारों की मृत्यु और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के आधार पर धार्मिक मान्यताओं तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच के अंतर पर सवाल उठाता है।
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ब्रह्मांड में हरा-सफेद बौना तारा और गुलाबी तारे का रहस्य: क्या विज्ञान बदल रहा है हमारी सोच?
16 अक्टूबर को खगोलविदों ने जो देखा है, वो धर्म के लिए एक और परेशान करने वाली खबर है. एक हरा-सफेद बौना तारा और उसके पास ही एक सैल्मन-गुलाबी तारा, पहली बार देखा गया. धर्म हमेशा से कहता आया है कि तारों को ईश्वर ने रोशनी के लिए बनाया लेकिन विज्ञान ने इस बात को गलत साबित किया है. सफेद बौना तारा एक मरे हुये तारे का बचा हुआ कोर होता है. हमारा सूरज भी एक दिन मरेगा, अपना ईंधन खत्म करेगा और सिकुड़ कर पृथ्वी के आकार का सफ़ेद बौना तारा रह जाएगा. अब सवाल यह है कि अब तक हमें सफेद, हल्के नीले, हल्के पीले बौने तारे ही मिले थे लेकिन हरा तारा क्यों नहीं मिला था? क्योंकि हरा रंग आंखों का धोखा है. तारों का रंग उसके तापमान से तय होता है. गर्म तारा नीला नजर आता है और ठंडा तारा लाल दिखाई पड़ता है. हरा रंग बीच में कहीं होता है. हमारी आंखें हरे और नीले-लाल के मिश्रण को सफेद देख लेती हैं इसलिए अब तक हरा तारा बनना लगभग असंभव माना जाता था. साइंटिस्टों का अनुमान है कि इस बौने हरे तारे के वातावरण में ऑक्सीजन, कार्बन और आयरन की एक अजीब परत है. जब उसका प्रकाश उस परत से निकला तो कुछ तो सोख ली गईं लेकिन कुछ बच गईं. बची हुई तरंगों का मिश्रण हमारी आंख को हरा-सफेद दिखाई दिया. बगल का दूसरा सैल्मन-गुलाबी वाला तारा भी वही है. इस गुलाबी तारे में हाइड्रोजन और हीलियम का ऐसा खेल चल रहा है कि यह तारा गुलाबी दिख रहा है. यह केमिस्ट्री है, फिजिक्स है और साइंस का कमाल है, किसी ईश्वर की पेंटिंग नहीं है. धर्म कहता है कि ब्रह्माण्ड इंसान के लिए बना है, इंसान को जो रंग पसंद हैं, वही सुंदर हैं लेकिन यूनिवर्स को इंसान की पसंद से कोई मतलब नहीं. वो हरा तारा भी बना सकता है जो आपकी आंख को अजीब लगे और गुलाबी तारा भी बना सकता है जो किसी धर्मग्रंथ में नहीं लिखा. इस खोज ने धर्म की दुकानदारी को खतरे में डाल दिया है. सफेद बौना मरा हुआ तारा असल में एक मरे हुए तारे का अवशेष है. इसका मतलब यह कि तारे भी मरते हैं. अगर तारे मरते हैं तो वो भी अमर नहीं हैं. अगर वो अमर नहीं हैं तो उन्हें किसी अमर सत्ता ने अमर रोशनी के लिए नहीं बनाया. वे फिजिक्स के नियमों के तहत बनते हैं, जलते हैं और मरते हैं. इससे यह साफ हो जाता है कि यूनिवर्स में नजर आने वाली डाइवर्सिटी किसी डिजाइन से नहीं, दुर्घटना से आती है. एक ही तरह के तारे मर कर अलग-अलग रंग के दिखते हैं क्योंकि मरते वक्त उनके अंदर क्या था? उनका तापमान क्या था? और उनका वातावरण क्या था? यह बात निर्धारित करती है कि उनका बचा हुआ कोर कैसा रहेगा? इसमें कोई प्लान नहीं है, सिर्फ संभावना है. हरा-सफेद बौना तारा इसलिए खूबसूरत नहीं है कि किसी ने उसे हमारे लिए रंग दिया है वो इसलिए खूबसूरत है कि बिना किसी के पेंट किये, सिर्फ गैस, गुरुत्वाकर्षण और समय की वजह से ऐसा रंग बन गया जो हमने पहले कभी नहीं देखा था. इससे यह साफ हो जाता है कि यूनिवर्स की सुंदरता असल में 14 अरब सालों के बीच हुई घटनाओं या दुर्घटनाओं का परिणाम है और इस सुंदरता को किसी ईश्वर की जरूरत नहीं है.