लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 12 अप्रैल 2026 स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर उत्तर प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ऐ के शर्मा को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की सहमति सर्वोपरि है और बिना अनुमति ऐसे मीटर लगाना कानून व संविधान दोनों के विरुद्ध है।
संसद और सोशल मीडिया तक उठा मुद्दा
सांसद चन्द्रशेखर ने बताया कि उन्होंने 27 मार्च को इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया था, जिसके बाद उन्होंने इसे लोकसभा में तारांकित प्रश्न संख्या-541 के माध्यम से भी प्रमुखता से रखा।
इस पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने जवाब में कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के तहत किसी भी उपभोक्ता पर उसकी सहमति के बिना प्रीपेड मीटर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक हैं।
केंद्र सरकार ने बदला आदेश
सांसद ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 1 अप्रैल को भारत सरकार और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी संशोधित आदेश में भी प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
नए निर्देशों के अनुसार अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की सहमति के आधार पर ही लगाए जाएंगे।
यूपी सरकार की चुप्पी पर सवाल
चन्द्रशेखर ने इस बात पर चिंता जताई कि केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति उपभोक्ताओं के हितों के विपरीत है और लाखों लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है।
संविधान के अनुच्छेद 254 का हवाला
सांसद ने अपने पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 254 का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी राज्य का प्रावधान केंद्र के कानून के विपरीत होता है, तो ऐसी स्थिति में केंद्र का कानून ही प्रभावी होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सहमति मीटर लगाए जाना न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह संविधान की भावना के भी खिलाफ है।
सरकार से की गई प्रमुख मांगें
सांसद चन्द्रशेखर ने ऊर्जा मंत्री से निम्न मांगें रखीं—
केंद्र सरकार के संशोधित आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित किया जाए
बिना सहमति मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगे
पहले से लगाए गए मीटरों की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को विकल्प दिया जाए
बिजली कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं
पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देकर उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल किया जाए
उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी
सांसद ने अपने पत्र के अंत में कहा कि प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं का विश्वास बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस गंभीर विषय पर जल्द ठोस कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर अब राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। जहां केंद्र सरकार ने इसे स्वैच्छिक बताया है, वहीं राज्य स्तर पर इसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।
