आरक्षण पर चिराग पासवान ने मांगा जीतनराम मांझी का इस्तीफा

आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आज भी दलितों के साथ होने वाले भेदभाव पर चिंता जताई है और कई उदाहरण दिए हैं. आजादी के बाद करीब 4-5 दशक तक लगातार कांग्रेस की सरकारें रही हैं. उसके बाद भी अगर समाज में भेदभाव होता रहा तो कहीं न कहीं नींव को मजबूत करने में सफल तो ये लोग भी नहीं रहे. इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे से इस्तीफा भी मांगा.

चिराग पासवान ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वो किस मुंह से कह रहे हैं कि आज भी समाज में भेदभाव मिटा नहीं है. अगर सामाजिक परिस्थिति बदली नहीं है तो यकीनन यह हमारी सरकार के लिए भी चिंता का विषय है. उनकी और हमारी चिंता समाज के एक वर्ग को लेकर एक जैसा है. लेकिन ऐसे में एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर क्या हमलोग आगे बढ़ पाएंगे? सामाजिक न्याय की लड़ाई में फिर नुकसान उसी वर्ग का होगा जो इस लड़ाई में मोहरा बनकर पिसता रहा है, तब भी और आज भी.

उन्होंने आगे कहा कि इसीलिए हमलोग अलग-अलग विषयों पर मजबूती से अपना पक्ष रखने की बात करते हैं. आरक्षण के सवाल पर हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि इसका आधार सामाजिक भेदभाव रहा है. आर्थिक दृष्टिकोण से इस पर चर्चा करना संविधान के खिलाफ जाना है. फिर भी, जो लोग आज चिंता व्यक्त कर रहे हैं, वे वही लोग हैं जिन्हें देश ने आजादी के बाद लंबे समय तक मौका दिया था.

केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (R) प्रमुख ने कहा, ”हर कोई अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहता है. मैं सिर्फ दो विषयों पर अपनी बातों को रखता हूं. एक संवैधानिक आधार, बदलना है तो संविधान को बदलें, सभी लोगों को लोकसभा के पटल पर आना चाहिए. संविधान में तो कहीं नहीं लिखा है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाएगा. आधार सामाजिक है और उसमें भी छुआछूत का मुद्दा है. मैं बड़े वर्ग के आरक्षण की बात नहीं कर रहा हूं. मैं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को आरक्षण देने की बात कर रहा हूं. उनके संबंध में लोग पूछते हैं कि ‘क्रीमी लेयर’ का प्रावधान क्यों नहीं है? कहा जाता है कि आरक्षण का लाभ लेना छोड़ दें.

Leave a Comment