फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 27 अगस्त 2026 बाढ़ की विपरीत परिस्थितियों के बीच फर्रुखाबाद के बाढ़ राहत शरणालय में रक्षाबंधन का पर्व मानवीय संवेदनाओं और अपनत्व की अनूठी मिसाल बन गया। राहत शरणालय में रह रहे बच्चों के लिए संचालित शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के सामने उस समय भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब नन्हीं बच्चियां अपने हाथों में राखियां लेकर उनके पास पहुंच गईं।
बच्चियों ने बड़े ही प्रेम और आत्मीयता के साथ बीएसए की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान शरणालय का माहौल स्नेह और भावनाओं से भर उठा। कुछ बच्चियों ने अपने छोटे-छोटे हाथों से कागज की राखियां स्वयं तैयार की थीं, जिन्हें उन्होंने अपने बड़े भाई की कलाई पर बांधकर रक्षाबंधन के पर्व को यादगार बना दिया।
कागज की राखियों में दिखा सच्चे प्रेम का रंग
इन राखियों में भले ही सोने-चांदी की चमक नहीं थी, लेकिन उनमें मासूमियत, विश्वास, स्नेह और अपनत्व की अनमोल भावनाएं समाई थीं। बच्चियों द्वारा स्वयं बनाई गई इन राखियों ने यह संदेश दिया कि किसी रिश्ते की खूबसूरती उसकी कीमत से नहीं, बल्कि उसमें छिपी भावनाओं से तय होती है।
बाढ़ जैसी कठिन परिस्थितियों के बीच राहत शरणालय में बच्चों की शिक्षा और उनकी भावनात्मक जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है। बीएसए के निरीक्षण के दौरान बच्चियों का यह आत्मीय व्यवहार पूरे माहौल को भावुक कर गया।
औपचारिकता नहीं, दिलों से मनाया गया रक्षाबंधन
एक ओर बाढ़ की चुनौती और दूसरी ओर राहत शरणालय में रह रहे बच्चों की मासूम मुस्कान—इन दोनों के बीच रक्षाबंधन का पर्व बेहद आत्मीय अंदाज में मनाया गया। श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भी बच्चियों के स्नेह को आत्मीयता से स्वीकार किया।
यह अवसर केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बच्चों और अधिकारी के बीच स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रिश्ते को भी मजबूत किया।
नन्हीं बच्चियों की बनाई साधारण सी कागज की राखियां इस अवसर की सबसे खास याद बन गईं। इन राखियों में किसी महंगे उपहार से कहीं अधिक मूल्यवान भावनाएं थीं।
वास्तव में, रिश्ते केवल खून के नहीं होते। कभी-कभी एक मासूम हाथ से बांधी गई राखी भी दिलों को स्नेह और विश्वास के मजबूत बंधन में जोड़ देती है।
