फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 09 मई 2026 जनपद के रोडवेज बस स्टेशन परिसर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा के अनावरण के बाद अब राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर लोग इसे इतिहास और संस्कृति से जोड़कर गौरव का विषय बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिलापट्ट पर जिले के कुछ दलित और पिछड़े वर्ग (PDA) के जनप्रतिनिधियों के नाम न होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।कार्यक्रम में कई बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों के नाम शिलापट्ट पर दर्ज किए गए, लेकिन आरोप है कि जिले के महत्वपूर्ण दलित और पिछड़े वर्ग के निर्वाचित प्रतिनिधियों के नाम इसमें शामिल नहीं किए गए। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।इन नेताओं के नाम न होने पर उठा विवादविवाद के केंद्र में जिन जनप्रतिनिधियों के नाम बताए जा रहे हैं, उनमें —तीन बार के विधायक सुशील शाक्य, कायमगंज सुरक्षित सीट से विधायक डॉ. सुरभि, जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या यह केवल प्रशासनिक चूक है या फिर जानबूझकर PDA वर्ग के नेताओं की अनदेखी की गई है।विपक्षी समर्थकों ने लगाए गंभीर आरोपकुछ राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे “दलित और पिछड़े समाज के सम्मान की अनदेखी” बताते हुए कहा कि जब जिले के निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही शिलापट्ट में स्थान नहीं दिया जाएगा, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।आलोचकों का कहना है कि यह केवल नाम छूटने का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उनका आरोप है कि सत्ता पक्ष अपनी ही पार्टी अथवा गठबंधन से जुड़े पिछड़े और दलित चेहरों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा।समर्थकों ने बताया ‘अनावश्यक राजनीति’वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस विवाद को “अनावश्यक राजनीतिक रंग” देने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापना इतिहास और राष्ट्र गौरव से जुड़ा विषय है, जिसे जातीय और राजनीतिक बहस में नहीं बदलना चाहिए।कुछ समर्थकों का यह भी कहना है कि शिलापट्ट में नाम शामिल करने की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर तय होती है और कई बार तकनीकी या प्रोटोकॉल कारणों से नाम छूट जाते हैं।जनता के बीच चर्चा का विषय बना मामलाफिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे सम्मान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संतुलन के नजरिए से देख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पर संबंधित जनप्रतिनिधियों या प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
फर्रुखाबाद में महाराणा प्रताप प्रतिमा अनावरण पर सियासी विवाद, शिलापट्ट से PDA नेताओं के नाम गायब होने पर उठे सवाल
