लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 30 मार्च 2026 उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब झूठी एफआईआर दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। आपसी रंजिश, निजी दुश्मनी या गलत मंशा से पुलिस तंत्र का दुरुपयोग करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि झूठे मामलों के जरिए पुलिस को गुमराह करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
क्या है नई व्यवस्था?
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी मामले की विवेचना के दौरान यह साबित होता है कि एफआईआर में दर्ज तथ्य मनगढ़ंत या झूठे हैं, तो संबंधित विवेचक (IO) को अनिवार्य रूप से कार्रवाई करनी होगी।
ऐसे मामलों में IO को आरोपी शिकायतकर्ता के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की प्रासंगिक धाराओं (जैसे 212 और 217) के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज करनी होगी।
सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों की सूची तैयार करें, जिनमें ‘फाइनल रिपोर्ट’ (FR) लगाकर आरोपियों को निर्दोष पाया गया है।
हाईकोर्ट के निर्देश भी लागू
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अब गंभीर और संदिग्ध मामलों में शिकायत दर्ज करने से पहले शिकायतकर्ता के बयान ऑडियो और वीडियो माध्यम से रिकॉर्ड किए जाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
शिकायतकर्ता बाद में अपने बयान से मुकर न सके
झूठे मामलों पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगे
विवेचना प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मजबूत बने
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से:
झूठे मुकदमों में कमी आएगी
निर्दोष लोगों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी
पुलिस संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा
हालांकि, यह भी जरूरी होगा कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल संतुलित तरीके से किया जाए, ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में कोई बाधा न आए।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश पुलिस का यह कदम न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे कानून का दुरुपयोग करने वालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
