फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 26 मार्च 2026 जनपद में निजी स्कूलों द्वारा किताबों, फीस और अन्य शैक्षिक सामग्री को लेकर की जा रही कथित मनमानी के खिलाफ अब आवाज तेज हो गई है। विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सीबीएसई बोर्ड एवं अन्य बोर्ड से संचालित नर्सरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के अधिकांश निजी स्कूल सरकार के निर्देशों की अनदेखी करते हुए एनसीईआरटी की पुस्तकों के बजाय प्राइवेट पब्लिकेशंस की महंगी किताबें चलवा रहे हैं। इसके चलते अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
हर साल बदल दी जाती हैं किताबें, अभिभावक मजबूर
ज्ञापन में कहा गया कि स्कूल प्रबंधन हर साल किताबों में मामूली बदलाव कर देते हैं, जिससे पुराने सेट का उपयोग संभव नहीं हो पाता और अभिभावकों को मजबूरन नया सेट खरीदना पड़ता है। इतना ही नहीं, जिन छात्रों के पास पुरानी किताबें होती हैं, उन्हें कक्षा में अपमानित कर नए सेट लेने का दबाव बनाया जाता है।
10 हजार तक पहुंच रही नर्सरी की किताबें
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि नर्सरी और कक्षा एक जैसी शुरुआती कक्षाओं के बच्चों के किताबों के सेट की कीमत ₹10,000 तक पहुंच रही है, जो आम परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है।
तय दुकानों से खरीदने का दबाव
स्कूलों पर यह भी आरोप है कि वे अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें, यूनिफॉर्म, टाई, बेल्ट आदि खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जिससे पारदर्शिता खत्म हो जाती है और मनमानी कीमत वसूली जाती है।
प्रमुख मांगें
ज्ञापन में जिला प्रशासन से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गईं—
सभी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी एवं सरकार द्वारा निर्धारित पुस्तकों से पढ़ाई सुनिश्चित की जाए।
किसी भी छात्र को नई किताब खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए।
यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव रोका जाए।
एडमिशन फीस की सीमा तय की जाए और उससे अधिक वसूली पर कार्रवाई हो।
कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित 25% आरक्षण की निष्पक्ष जांच कर सही लाभार्थियों को प्रवेश दिलाया जाए।
निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाया जाए और मनमानी फीस वसूली पर रोक लगे।
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द कर एफआईआर दर्ज की जाए।
जांच टीम और छापेमारी की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिला प्रशासन एक विशेष टीम गठित कर शहर व जिले के बुक स्टॉल्स पर छापेमारी करे और अभिभावकों से सीधे जानकारी लेकर दोषी स्कूलों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।
आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होगी।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
ज्ञापन देने के दौरान राजा मिश्रा, ओमनिवास पाठक, निश्चित दुबे (निशु), डॉ. पंकज राठौर, अवनीश त्रिवेदी (माधव), सभासद बाबू अग्निहोत्री, उमेश जाटव, रजत वर्मा, आयुष सक्सेना, अभिषेक श्रीवास्तव, सनी बाथम, विष्णु मिश्रा, शिवांग बाजपेई, सुमित भल्ला, महेश चंद्र, बंटी यादव, दीपक कनौजिया सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
फर्रुखाबाद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे इस मुद्दे ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है और अभिभावकों को कितनी राहत मिलती है।
