लखीमपुर खीरी : दुधवा टाइगर रिजर्व में हाथी–मानव संघर्ष प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित

लखीमपुर खीरी : ( द दस्तक 24 न्यूज) दुधवा टाइगर रिजर्व के पर्यटन परिसर स्थित ऑडिटोरियम में हाथी–मानव संघर्ष प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व के निर्देशन में दुधवा टाइगर रिजर्व एवं डब्लू डब्लू एफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुई। कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक डब्लू डब्लू एफ इंडिया, नई दिल्ली से आए एलीफैंट प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. अरित्र खेत्री तथा वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन रहे। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उप निदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व जगदीश आर ने हाथी–मानव संघर्ष की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए हाथियों की सतत निगरानी, उनके प्राकृतिक वास में सुधार तथा पूर्वानुमान आधारित सूचना प्रणाली को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया, जिससे किसान समय रहते अपनी फसलों की सुरक्षा कर सकें। उन्होंने समुदाय आधारित गतिविधियों को अपनाने और तकनीकी सहयोग के लिए डब्लू डब्लू एफ इंडिया से सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि हाथियों को रेडियो कॉलर लगाए जाने से उनके मूवमेंट पैटर्न की जानकारी मिलेगी, जिससे संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने तराई हाथी रिजर्व की विस्तृत जानकारी देते हुए कतर्नियाघाट में अपनाए गए सफल उपायों जैसे गज मित्रों का गठन, नेपाल के समुदायों से समन्वय, हल्दी की खेती तथा हाथी कॉरिडोर संरक्षण पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने मुआवजा प्रक्रिया की भी जानकारी दी।
कार्यशाला में क्षेत्रीय वनाधिकारी मझगई अंकित सिंह, दक्षिण निघासन रेंज मोबिन आरिफ, मोहम्मदी निर्भय प्रताप शाही एवं गोला रेंज के उप क्षेत्रीय वनाधिकारी राम नरेश वर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए हाथी–मानव संघर्ष से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर सुझाव दिए।
डॉ. अरित्र खेत्री ने रेडियो टेलीमेट्री के माध्यम से हाथियों की निगरानी के मॉडल, उनके व्यवहार और प्राकृतिक वास सुधार पर महत्वपूर्ण जानकारी दी तथा वन विभाग एवं स्थानीय समुदाय को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
राजस्व विभाग की ओर से गोला के नायब तहसीलदार ताहिर परवेज़ ने आपदा राहत निधि से मुआवजा प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग इस संवेदनशील विषय पर त्वरित कार्रवाई के लिए सदैव तत्पर है।
कार्यशाला में हाथी प्रभावित गांवों के ग्राम प्रधानों ने भी अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। उप प्रभागीय वनाधिकारी निघासन मनोज कुमार तिवारी ने हाथी–मानव सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदाय, इको विकास समितियों, बाघ मित्रों एवं गज मित्रों को सशक्त बनाने पर बल दिया।
अंत में उप प्रभागीय वनाधिकारी बेलरायां दीपक कुमार पांडे ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सफल आयोजन के लिए डब्लू डब्लू एफ इंडिया की सराहना की।
कार्यशाला में दुधवा नेशनल पार्क के वार्डन महावीर प्रसाद, समस्त क्षेत्रीय वनाधिकारी, बफर जोन के अधिकारी, फील्ड स्टाफ, ग्राम प्रधान एवं ग्रामीणों के साथ डब्लू डब्लू एफ इंडिया के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवि, सलाहकार नाशित अली, सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम एवं बायोलॉजिस्ट अपूर्व गुप्ता उपस्थित रहे।