Saturday, 03 October 2026 | 4:07 AM
उत्तर प्रदेश

लखीमपुर खीरी: विश्व वृद्धजन दिवस पर जिला अस्पताल में संगोष्ठी, स्वस्थ और गरिमापूर्ण वृद्धावस्था पर जोर

विश्व वृद्धजन दिवस के अवसर पर जिला अस्पताल लखीमपुर खीरी में गुरुवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
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लखीमपुर खीरी: विश्व वृद्धजन दिवस पर जिला अस्पताल में संगोष्ठी, स्वस्थ और गरिमापूर्ण वृद्धावस्था पर जोर
लखीमपुर खीरी: विश्व वृद्धजन दिवस पर जिला अस्पताल में संगोष्ठी, स्वस्थ और गरिमापूर्ण वृद्धावस्था पर जोर
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लखीमपुर: विश्व वृद्धजन दिवस के अवसर पर जिला अस्पताल, लखीमपुर खीरी में गुरुवार को संगोष्ठी आयोजित कर वृद्धजनों के बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सहभागिता के प्रति जागरूक किया गया। इस वर्ष विश्व वृद्धजन दिवस की थीम “The Age of Longevity: Rethinking Systems for Longer Lives” यानी “दीर्घायु का युग: लंबी उम्र के लिए व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार” है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीएमएस डॉ. आरके कोली ने कहा कि वृद्धावस्था जीवन का महत्वपूर्ण चरण है और इसे बीमारी के पर्याय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को समय पर चिकित्सा सुविधा, परिवार का सहयोग और समाज में सम्मान मिले तो वे लंबे समय तक स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जी सकते हैं। अस्पताल में आने वाले बुजुर्ग मरीजों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और आवश्यकतानुसार जांच एवं उपचार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

डॉ. रचित मिश्रा ने वृद्धावस्था में होने वाली सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी। बुजुर्गों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवाएं लेने तथा बिना चिकित्सकीय परामर्श दवाओं को बंद न करने की सलाह दी।

डॉ. शिशिर पांडेय ने कहा कि वृद्धजनों के स्वास्थ्य में मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी शारीरिक स्वास्थ्य की। उम्र बढ़ने के साथ अकेलापन, सामाजिक दूरी, नींद में बदलाव, चिंता, उदासी तथा याददाश्त संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं। 

डॉ शिखर बाजपेई ने कहा कि स्वस्थ वृद्धावस्था की शुरुआत दैनिक जीवनशैली से होती है। संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पर्याप्त पानी, नियमित हल्का व्यायाम अथवा टहलना, पर्याप्त नींद, नशे से दूरी और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण बुजुर्गों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि वृद्धजनों की देखभाल केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। 

 संगोष्ठी में डेंटल सर्जन डॉ इंद्रेश राजावत, अतुल कुमार पाण्डेय, विवेक मित्तल, पंकज शुक्ला, सुरेंद्र कश्यप, नीरज कुमार, सरिता एवं समस्त नर्सिंग स्टाफ द्वारा प्रतिभाग किया गया