चिकोरी उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रशासन सख्त, प्रसंस्करण इकाइयों को दिए आवश्यक निर्देश।
चिकोरी उत्पादन, प्रसंस्करण एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में बैठक आयोजित।
कासगंज, 25 अगस्त। आज विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में चिकोरी उत्पादन, प्रसंस्करण एवं निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनपद की चिकोरी प्रसंस्करण इकाइयों के संचालकों एवं निर्यातकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप कृषि निदेशक महेंद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार, ज्येष्ठ कृषि विपणन अधिकारी प्रमोद कुमार सहित चिकोरी प्लांट संचालक एवं किसान उपस्थित रहे।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने चिकोरी प्लांट संचालकों को निर्देशित किया कि एग्रीमेंट के आधार पर जिन किसानों को चिकोरी बीज उपलब्ध कराया गया है, उन्हीं किसानों से चिकोरी की खरीद सुनिश्चित की जाए। साथ ही किसानों का पिछले वर्ष का बकाया भुगतान तत्काल करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में किसानों द्वारा पिछले वर्ष की चिकोरी का भुगतान न किए जाने की शिकायत भी रखी गई। इस संबंध में मै0 बालाजी धाम, सिरौरी, सहावर के संचालक श्री हरी सिंह एवं दुर्गेश इंटरप्राइजेज के संचालक श्री दुर्गेश पुत्र श्री खरग सिंह, विजयपुर, एटा के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई। मुख्य विकास अधिकारी महोदय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कृषि अधिकारी को संबंधित चिकोरी संचालकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
चिकोरी संचालकों द्वारा अवगत कराया गया कि चिकोरी की बुवाई का उपयुक्त समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक है, जबकि कुछ किसानों द्वारा दिसंबर तक बुवाई की जाती है, जिसके कारण चिकोरी की खुदाई 15 मार्च से 15 मई तक की जाती है। मुख्य विकास अधिकारी महोदय ने किसानों से अपील की कि चिकोरी की बुवाई निर्धारित समयावधि में ही करें, जिससे उत्पादन एवं गुणवत्ता बेहतर रहे।
उन्होंने किसानों को यह भी निर्देशित किया कि किसी भी चिकोरी संचालक से बिना एग्रीमेंट के बीज प्राप्त न करें। गैर-अनुबंधित संस्था अथवा अन्य स्रोत से बीज लेकर बुवाई करने पर किसान स्वयं जिम्मेदार होंगे।
मुख्य विकास अधिकारी महोदय ने कहा कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग चिकोरी उत्पादक किसानों, निर्यातकों तथा प्रसंस्करण इकाइयों के संचालकों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य करेंगे। प्रशासन का पूरा प्रयास रहेगा कि चिकोरी उत्पादक किसानों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण अथवा अन्याय न हो तथा उन्हें उनकी उपज का उचित भुगतान समय से प्राप्त हो। साथ ही जनपद में चिकोरी उत्पादन, प्रसंस्करण एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

