प्रयागराज पुलिस, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में “Skill enhancement workshop of police investigation officers in Medicolegal cases” के सम्बन्ध में पाच दिवसीय विशेष कार्यशाला का शुभारम्भ,

माननीय न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय, इलाहाबाद श्री अरुण कुमार सिंह देशवाल ने किया शुभारम्भ; 1,150 विवेचकों को मिलेगा आधुनिक एवं साक्ष्य-आधारित अनुसंधान का प्रशिक्षण

पाँच दिनों में 1,150 विवेचकों को नवीन आपराधिक कानूनों, फॉरेंसिक विज्ञान, डिजिटल साक्ष्य एवं आधुनिक अनुसंधान तकनीकों का दिया जाएगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज द्वारा आपराधिक विवेचनाओं को अधिक वैज्ञानिक, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पाँच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला (“Skill enhancement workshop of police investigation officers in Medicolegal cases”) का आयोजन मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज में किया जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य विवेचना की गुणवत्ता में व्यापक सुधार, वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों का प्रभावी उपयोग, नवीन आपराधिक कानूनों का विधिसम्मत क्रियान्वयन तथा माननीय न्यायालय की अपेक्षाओं के अनुरूप अनुसंधान प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

दिनांक 27 जुलाई से 31 जुलाई, 2026 तक आयोजित होने वाली यह विशेष कार्यशाला प्रोफेसर प्रीतमदास ऑडिटोरियम, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज में संचालित की जा रही है। कार्यशाला में प्रतिदिन लगभग 230 विवेचकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रकार पाँच दिनों में कुल 1,150 पुलिस अधिकारियों एवं विवेचकों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक विवेचना पद्धतियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

कार्यशाला का भव्य शुभारम्भ माननीय न्यायाधीश, मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद, श्री अरुण कुमार सिंह देशवाल के कर-कमलों द्वारा किया गया। कार्यक्रम पुलिस आयुक्त, प्रयागराज श्री जोगेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) वी.बी. सहाय, प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ए.के. वर्मा, निदेशक राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ, प्रो. (डॉ.) आदर्श कुमार, विभागाध्यक्ष एवं आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अर्चना कौल तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार राय मंचासीन रहे।

पुलिस विभाग की ओर से अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था डॉ. अजय पाल शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय श्री विजय ढुल, पुलिस उपायुक्त अपराध, पुलिस उपायुक्त नगर, पुलिस उपायुक्त गंगानगर, पुलिस उपायुक्त यमुनानगर, पुलिस उपायुक्त लाइन्स एवं पुलिस उपायुक्त मुख्यालय सहित पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

विवेचना को वैज्ञानिक और न्यायोन्मुखी बनाना कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विवेचकों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रावधानों की गहन एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है। इसके साथ ही प्रतिभागियों को वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों के प्रभावी संकलन और उपयोग, घटनास्थल के सुरक्षित एवं विधिसम्मत प्रबंधन, डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण, केस डायरी के गुणवत्तापूर्ण लेखन, आरोप-पत्र की विधिक सुदृढ़ता तथा प्रभावी अभियोजन की तैयारी के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशिक्षण के माध्यम से विवेचकों को ऐसी आधुनिक अनुसंधान तकनीकों से परिचित कराया जाएगा, जिनके प्रभावी प्रयोग से विवेचना में होने वाली प्रक्रियागत त्रुटियों को न्यूनतम किया जा सके, साक्ष्यों की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो तथा न्यायालय में अभियोजन पक्ष को अधिक सुदृढ़ता प्रदान की जा सके। कार्यशाला का लक्ष्य केवल विवेचना पूर्ण करना नहीं, बल्कि ऐसी दोषरहित एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करना है, जो पीड़ित को समयबद्ध न्याय दिलाने और अपराधी को विधिसम्मत दंड दिलाने में प्रभावी सिद्ध हो।

गुणवत्तापूर्ण विवेचना प्रभावी न्याय व्यवस्था की आधारशिला-
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए माननीय न्यायाधीश श्री अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक विवेचना किसी भी प्रभावी न्याय व्यवस्था की आधारशिला होती है। विवेचना जितनी तथ्यपरक, विधिसम्मत और वैज्ञानिक होगी, न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य उतने ही अधिक विश्वसनीय और प्रभावी होंगे।
उन्होंने कहा कि अपराध की निष्पक्ष एवं सूक्ष्म विवेचना न केवल दोषियों को दंडित कराने के लिए आवश्यक है, बल्कि निर्दोष व्यक्ति के हितों की रक्षा के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अनुसंधान के दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विधिक प्रक्रियाओं और साक्ष्यों की शुचिता का पालन किए जाने से न्यायालय में दोषसिद्धि की संभावना अधिक सुदृढ़ होती है।

माननीय न्यायाधीश ने सभी विवेचकों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान, अनुभव और आधुनिक तकनीकों को अपने कार्यों में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विवेचक का दायित्व है कि वह विवेचना को केवल एक विभागीय प्रक्रिया न मानकर न्याय प्रदान करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में ग्रहण करे।

प्रत्येक विवेचना को पारदर्शी, समयबद्ध और उच्च गुणवत्तापूर्ण बनाना हमारा संकल्प—पुलिस आयुक्त
पुलिस आयुक्त, प्रयागराज श्री जोगेन्द्र कुमार ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज का स्पष्ट संकल्प प्रत्येक विवेचना को निष्पक्ष, पारदर्शी, समयबद्ध, वैज्ञानिक एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण बनाना है। गुणवत्तापूर्ण विवेचना ही अपराध नियंत्रण, प्रभावी अभियोजन और न्यायालय में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने कहा कि बदलती आपराधिक प्रवृत्तियों, तकनीक के बढ़ते प्रयोग और डिजिटल साक्ष्यों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए विवेचकों को नवीन कानूनों एवं आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों से निरंतर अद्यतन रखना अत्यंत आवश्यक है। यह प्रशिक्षण पुलिस अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता, विधिक समझ तथा वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराध का अनावरण करना नहीं, बल्कि साक्ष्यों पर आधारित ऐसी निष्पक्ष एवं त्रुटिरहित विवेचना सुनिश्चित करना है, जिससे पीड़ितों को त्वरित न्याय मिले और अपराधियों के विरुद्ध न्यायालय में प्रभावी अभियोजन किया जा सके। इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं पुलिस व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी एवं न्यायोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

विशेषज्ञों द्वारा दिया जाएगा विषयगत एवं केस-आधारित प्रशिक्षण
पाँच दिवसीय कार्यशाला के दौरान विषय-विशेषज्ञों द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों, फॉरेंसिक विज्ञान, साइबर अपराध अनुसंधान, डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, घटनास्थल प्रबंधन, महिला एवं बाल अपराधों की संवेदनशील विवेचना, चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों, न्यायालयीन प्रक्रिया तथा प्रभावी अभियोजन से संबंधित विषयों पर विस्तृत व्याख्यान एवं प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
प्रतिभागियों के लिए संवादात्मक प्रशिक्षण सत्र, व्यावहारिक अभ्यास, वास्तविक प्रकरणों का अध्ययन तथा केस-आधारित विश्लेषण भी आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से विवेचकों को अनुसंधान के दौरान उत्पन्न होने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान, साक्ष्यों के समुचित अभिलेखीकरण तथा मा0 न्यायालय में अभियोजन को सुदृढ़ बनाने की प्रभावी तकनीकों से परिचित कराया जाएगा।
यह विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला पुलिस विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, साक्ष्य-आधारित, प्रभावी एवं न्यायोन्मुखी बनाने की दिशा में एक दूरगामी पहल सिद्ध होगी। इससे न केवल पुलिस अधिकारियों की अनुसंधान क्षमता एवं व्यावसायिक दक्षता में वृद्धि होगी, बल्कि अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी अभियोजन, दोषसिद्धि दर में सुधार तथा पीड़ितों को त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

द दस्तक 24
प्रभारी पत्रकार तहसील कोरांव प्रयागराज उमाशंकर कुशवाहा 7571974858

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