फर्रुखाबाद: आज के दौर में डॉ. अंबेडकर के विचारों की प्रासंगिकता: समानता से सशक्त समाज की ओर -जयन्त शाक्य

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 अप्रैल 2026 भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे दूरदर्शी विचारक थे जिनकी सोच समाज के हर वर्ग के समग्र विकास पर केंद्रित थी। उनके विचार केवल जाति उन्मूलन तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने आर्थिक समानता, महिला शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।

डॉ. अंबेडकर का मानना था कि जब तक समाज के हर व्यक्ति को समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक सच्चे लोकतंत्र की स्थापना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि केवल राजनीतिक लोकतंत्र पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी उतना ही आवश्यक है।

आज के समय में, भले ही हमारे देश में कानून सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न नजर आती है। आर्थिक असमानता, शिक्षा के क्षेत्र में भेदभाव और सत्ता में सीमित प्रतिनिधित्व जैसी समस्याएं अभी भी समाज में मौजूद हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि अंबेडकर के सपनों का भारत अभी पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है।

महिला शिक्षा को लेकर भी अंबेडकर का दृष्टिकोण अत्यंत प्रगतिशील था। उनका मानना था कि यदि महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाया जाए, तो पूरा समाज उन्नति की ओर अग्रसर होगा। इसी प्रकार उन्होंने वंचित वर्गों की राजनीतिक भागीदारी को भी जरूरी बताया, ताकि नीति निर्माण में सभी वर्गों की आवाज शामिल हो सके।

आज जरूरत है कि हम अंबेडकर के विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन और नीतियों में लागू करें। सामाजिक समरसता, आर्थिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अंततः, डॉ. अंबेडकर का संदेश हमें यह सिखाता है कि एक सशक्त और समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है, जब हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार और अवसर मिले। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे, और हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर एक बेहतर समाज का निर्माण करना चाहिए।

– जयन्त शाक्य

जिला पंचायत प्रत्याशी, शमशाबाद तृतीय