फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 21 अगस्त 2026 जनपद के ब्लॉक नवाबगंज के ग्राम रसिदाबाद वल्लभ में एक मासूम बच्ची के करीब 45 फीट गहरे सूखे कुएं में गिरने की घटना ने पूरे गांव को दहला दिया। कुएं की गहराई, अंधेरा और सीमित जगह के बीच मासूम सोम्या जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी। दूसरी ओर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एम्बुलेंस सेवा और रेस्क्यू टीमों ने युद्धस्तर पर अभियान शुरू कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही समय के खिलाफ शुरू हुई इस जद्दोजहद का परिणाम करीब तीन घंटे बाद सामने आया। रेस्क्यू टीम ने अथक प्रयासों के बाद सोम्या को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद मौके पर ही उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और 108 एम्बुलेंस से तत्काल जिला चिकित्सालय लोहिया भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने आवश्यक जांच और उपचार शुरू किया।
45 फीट गहरे अंधेरे में जिंदगी के लिए जूझ रही थी मासूम
रसिदाबाद वल्लभ गांव में जब सोम्या के कुएं में गिरने की जानकारी ग्रामीणों और प्रशासन को मिली तो मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए। परिजनों की चिंता और ग्रामीणों की बेचैनी के बीच प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमें तत्काल सक्रिय हुईं।
कुएं की करीब 45 फीट गहराई ने रेस्क्यू अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। इसके बावजूद रेस्क्यू टीम ने ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ कुएं में उतरकर बच्ची तक पहुंचने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया।
सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चा
मामले की गंभीरता को देखते हुए एमओआईसी कायमगंज डॉ. विनीत और एमओआईसी नवाबगंज डॉ. लोकेश शर्मा तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुए। तीन 108 एंबुलेंस भी मौके पर भेजी गईं, ताकि बच्ची के बाहर निकलते ही उसे बिना किसी देरी के चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
रेस्क्यू अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मौके पर आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था बनाए रखी। प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच लगातार समन्वय से रेस्क्यू के साथ-साथ बच्ची को अस्पताल पहुंचाने की तैयारी भी समानांतर रूप से चलती रही।
तीन घंटे बाद आया राहत भरा पल
करीब तीन घंटे की लगातार मेहनत के बाद आखिरकार वह पल आया जिसका सभी को इंतजार था। रेस्क्यू टीम ने मासूम सोम्या को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
कुएं से बच्ची के बाहर आते ही परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। रेस्क्यू के बाद चिकित्सा टीम ने मौके पर ही बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसके बाद चिकित्सक एवं स्टाफ नर्स की निगरानी में उसे 108 एंबुलेंस से तत्काल जिला चिकित्सालय लोहिया भेजा गया।
जिलाधिकारी की सक्रियता से समानांतर चली पूरी व्यवस्था
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की सक्रिय प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सतत निगरानी के तहत संबंधित विभागों को तत्काल सक्रिय किया गया। रेस्क्यू अभियान के साथ ही एंबुलेंस, प्राथमिक चिकित्सा, अस्पताल में जांच और उपचार की व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखी गईं।
प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य था कि बच्ची को कुएं से बाहर निकालने के बाद चिकित्सा सहायता मिलने में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। इसी के चलते रेस्क्यू से लेकर अस्पताल तक की पूरी प्रक्रिया को आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़ाया गया।
कुएं से अस्पताल तक हर कदम पर चिकित्सा निगरानी
सोम्या को कुएं से बाहर निकालने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किसी तरह की शिथिलता नहीं बरती। डिप्टी सीएमओ डॉ. आर.सी. माथुर के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने मौके पर बच्ची का तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण किया।
इसके बाद चिकित्सक एवं स्टाफ नर्स की निगरानी में उसे 108 एंबुलेंस के माध्यम से जिला चिकित्सालय लोहिया भेजा गया। इस तरह सूखे कुएं के अंधेरे से अस्पताल तक सोम्या की जिंदगी का सफर चिकित्सकीय निगरानी में पूरा हुआ।
जिला अस्पताल में शुरू हुआ इलाज का दूसरा मोर्चा
जिला चिकित्सालय लोहिया पहुंचने के बाद सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा के नेतृत्व में डॉ. विवेक सक्सेना और अन्य चिकित्सकों ने तत्काल चिकित्सा व्यवस्था संभाली।
बच्ची की स्थिति का आकलन करने के लिए आवश्यक रक्त जांच, सीटी स्कैन सहित अन्य चिकित्सकीय परीक्षण कराए गए। चिकित्सकों की टीम ने लगातार निगरानी रखते हुए आवश्यक उपचार और सुरक्षित मेडिकल मैनेजमेंट सुनिश्चित किया।
कुछ घंटे पहले जिस बच्ची की जिंदगी 45 फीट गहरे कुएं में फंसी हुई थी, वह अब चिकित्सकों की निगरानी में सुरक्षित थी। इससे परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय कार्यशैली का दिखा प्रभाव
गौरतलब है कि सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने करीब दो माह पूर्व जनपद फर्रुखाबाद के स्वास्थ्य विभाग की कमान संभाली है। इस अवधि में स्वास्थ्य सेवाओं में त्वरित प्रतिक्रिया, सक्रियता, सतत निगरानी तथा विभागीय एवं अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सोम्या के रेस्क्यू में स्वास्थ्य विभाग की यह कार्यशैली जमीन पर दिखाई दी। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हुईं, मौके पर चिकित्सा व्यवस्था पहुंचाई गई, 108 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई और बच्ची को बाहर निकालने के बाद तत्काल मेडिकल असेसमेंट कर जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।
यह पूरी प्रक्रिया आपात परिस्थितियों में त्वरित निर्णय और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की मिसाल के रूप में सामने आई।
सीएमओ ने की खुले कुओं और बोरवेल को सुरक्षित करने की अपील
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपदवासियों से अपील की है कि अनुपयोगी बोरवेल, खुले कुओं और गड्ढों को किसी भी स्थिति में खुला न छोड़ा जाए। उन्हें सुरक्षित तरीके से ढककर रखा जाए और बच्चों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए।
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल अभिभावकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। थोड़ी सी सावधानी किसी बड़े हादसे को रोक सकती है और एक जिंदगी बचाई जा सकती है।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी सभी चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को जनसेवा के लिए तत्पर रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
रेस्क्यू से अस्पताल तक दिखा टीमवर्क
सोम्या के सुरक्षित बचने की पूरी घटना ने यह साबित किया कि आपात स्थिति में समय पर सक्रिय होने वाली हर व्यवस्था जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सूचना मिलने से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई, रेस्क्यू, एंबुलेंस, मौके पर चिकित्सा परीक्षण और अस्पताल में उपचार तक—हर कड़ी समय पर सक्रिय रही।
इसी समन्वित प्रयास का परिणाम रहा कि करीब 45 फीट गहरे कुएं में फंसी मासूम सोम्या को लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और उसे समय रहते चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई।
एक बेटी बची, एक परिवार बचा और एक उम्मीद कायम रही
सोम्या के लिए यह सिर्फ एक रेस्क्यू अभियान नहीं था, बल्कि जिंदगी की जंग थी। 45 फीट गहरे अंधेरे से सुरक्षित बाहर आना उसके परिवार के लिए किसी नई जिंदगी से कम नहीं।
यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है कि खुले कुएं, बोरवेल और गड्ढे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं। ऐसे स्थानों को सुरक्षित करना और बच्चों को उनसे दूर रखना जरूरी है।
सोम्या की कहानी इस बात की मिसाल बन गई कि अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, यदि बचाने वाले हाथ समय पर पहुंच जाएं तो जिंदगी फिर रोशनी की ओर लौट सकती है।
सोम्या के साहस, रेस्क्यू टीम की तत्परता, स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता और प्रशासनिक समन्वय ने मिलकर एक मासूम जिंदगी को बचाने में अहम भूमिका निभाई।
“जब प्रशासन की तत्परता, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और रेस्क्यू टीमों का समन्वय एक साथ खड़ा होता है, तो 45 फीट का अंधेरा भी जिंदगी की रोशनी को रोक नहीं सकता।”
