आजमगढ़ :आजमगढ़ के कन्धरापुर में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर के.सी.एम. जूनियर हाई स्कूल कंधरापुर में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के बैनर तले हो रही संगोष्ठी में प्रबुद्ध वक्ताओं ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा और वर्तमान चुनौतियों पर हुंकार भरी। संगोष्टि की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ जिला इकाई के अध्यक्ष दुर्गा राय एवं संचालन महासचिव सुरेश चंद्र यादव ने किया। इस वैचारिक मंथन में पत्रकार संदीप उपाध्याय ने सत्य की राह में मिलने वाली सजाओं को खतरा बताते हुए अंततः जीत का संकल्प लिया, वहीं शिव गोविंद उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता की गरिमा कभी नहीं गिरी, बस पत्रकारों को स्वयं सिद्धांतों पर अडिग रहना होगा। कार्यक्रम में प्रदीप तिवारी ने ‘संघे शक्ति कलियुगे’ का मंत्र देकर संगठन की मजबूती पर बल दिया, जबकि प्रदेश संरक्षक रामचंद्र राय ने पत्रकार उत्पीड़न पर सक्षम अधिकारीयों से मिलकर समाधान निकालने में कलम की ताकत का प्रयोग उत्तम बताया और हरेंद्र कुमार ने शासन-प्रशासन द्वारा मीडियाकर्मियों के दमन के मामलों को प्रमुखता से उठाया। देश के हालातों पर प्रहार करते हुए सुरेश गौतम ने गिरते रुपये को और कोदई जी ने विदेशी कंपनियों के बढ़ते प्रभुत्व को गुलामी का संकेत बताया; साथ ही कोदई जी ने शिक्षित बेरोजगारों, वकीलों व पत्रकारों को ‘कॉकरोच’ बताने वाली मानसिकता का उग्र विरोध न होने को बड़ा खतरा माना। इतिहास का संदर्भ देते हुए सुरेश चंद्र यादव ने कहा कि 30 मई 1826 को निकले पहले हिंदी अखबार ‘उदन्त मार्तण्ड’ को भले ही सहयोग न मिलने से वह डेढ़ वर्ष में बंद हो गया, पर इतिहास आज भी उसी का है; उन्होंने पूंजीपतियों द्वारा चंदा देकर अपने हित में कानून बनवाने और ऊपर प्रधानमंत्री से लेकर नीचे ग्राम प्रधान तक फैले भ्रष्टाचार से जनता के परेशान होने की बात कही।सामाजिक बुराइयों पर चिंता जताते हुए वीरेंद्र विश्वकर्मा ने मोबाइल-लैपटॉप पर ऑनलाइन अश्लीलता रोकने के लिए पत्रकारों से लिखने और राष्ट्रवाद की राह में रोड़ा बनने वालों का विरोध करने की अपील की, वहीं शिव प्रकाश पांडे ने इस दिवस को विशेष जागरूकता दिवस के रूप में स्थापित करने पर बल दिया। अंत में, बुजुर्ग पत्रकार बद्री प्रसाद गुप्ता ने सरकार को चेताते हुए कहा कि जैसे चार पिलर में से एक भी गिरने पर पूरी छत ढह जाती है, ठीक वैसे ही पत्रकारिता स्तंभ को ध्वस्त करना पूरे देश को डुबोने का संकेत है, जिसे हर हाल में एकजुट होकर बचाना होगा; इसी कड़ी में, पत्रकारिता के सच्चे मार्ग पर चलकर समाज में अपनी लेखनी का लोहा मनवाने वाले सभी निष्पक्ष पत्रकार साथियों को फूल मलाओं के साथ पत्रकार श्री सम्मान पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
आजमगढ़ :हिंदी पत्रकारिता दिवस पर गर्जना: “सत्य की राह पर अडिग रहेंगे पत्रकार, तभी बचेगा लोकतंत्र”
