लखीमपुर खीरी : (द दस्तक 24 न्यूज) स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (एएसएमसी) लखीमपुर खीरी के ईएनटी विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। प्रधानाचार्या प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में कॉलेज के ईएनटी विभाग द्वारा पहली बार ‘इंट्राटिम्पेनिक स्टेरॉयड इंजेक्शन’ जैसी अत्याधुनिक तकनीक के जरिए एक मरीज के अचानक कम सुनाई देने की गंभीर समस्या का सफल उपचार किया गया है। अब जनपद और आसपास के मरीजों को इस आधुनिक और वैज्ञानिक इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। ईएनटी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि एक 40 वर्षीय मरीज करीब सात दिन पहले हुए एक तेज धमाके के बाद अचानक कम सुनाई देने और कान में लगातार तेज सनसनाहट (टिनिटस) होने की गंभीर शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टरों के अनुसार तेज धमाके या अत्यधिक शोर के कारण अचानक सुनने की क्षमता खो देना (Sudden Sensorineural Hearing Loss) एक ‘मेडिकल इमरजेंसी’ की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में यदि मरीज को सही और सटीक समय पर इलाज मिल जाए तो उसके कान की सुनने की क्षमता को काफी हद तक वापस बचाया जा सकता है।
मरीज की गंभीरता को देखते हुए ईएनटी विभाग की टीम ने तत्काल उसका उपचार शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस और आधुनिक मेडिकल लिटरेचर के आधार पर मरीज को सीधे कान के पर्दे के अंदर ‘इंट्राटिम्पेनिक स्टेरॉयड इंजेक्शन’ दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया को ऑपरेशन थिएटर में बेहद कुशलता से अंजाम दिया गया जहां डॉ. श्वेता द्वारा मरीज के कान को सुन्न किया गया और सहायक आचार्य डॉ. मनोज शर्मा द्वारा यह विशेष इंजेक्शन थेरेपी दी गई। वर्तमान समय में इस थेरेपी को विश्वभर में अचानक बहरेपन और कान की सनसनाहट के लिए सबसे प्रभावी, वैज्ञानिक और सुरक्षित इलाज माना जाता है।
चिकित्सा महाविद्यालय की प्रधानाचार्या प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता ने इस ऐतिहासिक कामयाबी पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। उन्होंने बताया कि जिला मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार अपग्रेड कर रहा है। भविष्य में इस प्रकार के मरीजों के लिए प्लेटलेट रिच प्लाज्मा जैसी और भी अत्याधुनिक एडवांस तकनीक के उपयोग पर काम किया जा रहा है जिसके लिए अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। लखीमपुर खीरी मेडिकल कॉलेज में इस तरह की आधुनिक उपचार पद्धति शुरू होने से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव आया है।
