प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्लास्टिक प्रदूषण की बढ़ती समस्या का जिक्र किया है। एक बार इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक फेंके जाने के बाद वर्षों तक प्रकृति को नुकसान पहुंचाता रहता है। इसलिए प्लास्टिक कचरे का सही तरीके से निपटारा बेहद जरूरी है। अपने कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने ऐसे ही कुछ बेहद अनूठे प्रयासों का जिक्र भी किया। प्रधानमंत्री ने मन की बात में बिहार के सीतामढ़ी का उदाहरण दिया। यहां बेकार प्लास्टिक को दोबारा इस्तेमाल कर बेंच बनाई जा रही है। एक बेंच बनाने में करीब 40 किलो एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है। इन बेंचों को सरकारी स्कूलों, पार्कों और सार्वजनिक जगहों पर लगाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे ‘कचरे से कमाई’ का उदाहरण बताया।
भारत में प्लास्टिक का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इससे निकलने वाला कचरा बड़ी चुनौती बन गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने संसद में बताया है कि 2022-23 में देश में 41.3 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ। यानी औसतन हर दिन करीब 11,300 टन प्लास्टिक कचरा निकला।
वहीं, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों के क्रियान्वयन पर जारी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 2020-21 में करीब 3.45 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ था। 2021-22 में यह बढ़कर करीब 3.78 लाख टन हो गया। यानी एक साल में दिल्ली में करीब 32,600 टन ज्यादा प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ।
