राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकार ने मांगे जनता के सुझाव

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के तहत खासकर अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लाभार्थी परिवारों के बीच खाद्यान्न वितरण में लंबे समय से चली आ रही असमानताओं को दूर करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर दिया है और इस पर आम जनता से सुझाव मांगे हैं।

मौजूदा व्यवस्था के तहत अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थी, जिन्हें सबसे गरीब परिवारों की श्रेणी में रखा जाता है, उन्हें हर परिवार के लिए हर महीने 35 किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है। वहीं, प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति हर महीने 5 किलोग्राम खाद्यान्न देने का प्रावधान है।

परिवार-आधारित इस व्यवस्था के कारण असमानता की स्थिति पैदा हो जाती है। छोटे परिवारों को प्रति व्यक्ति अधिक खाद्यान्न मिल जाता है, जबकि बड़े परिवारों में प्रति व्यक्ति मिलने वाला खाद्यान्न कम हो जाता है। कई मामलों में यह मात्रा प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों को मिलने वाले खाद्यान्न से भी कम पड़ जाती है।

सरकार का मानना है कि इस असंतुलन के कारण खाद्यान्न वितरण की निष्पक्षता और पोषण संबंधी जरूरतों को लेकर सवाल उठे हैं। इसलिए अब सरकार इस व्यवस्था में सुधार कर समान श्रेणी के लाभार्थियों के बीच मौजूद असमानता को खत्म करना, खाद्यान्न आवंटन को अधिक तार्किक बनाना और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्था तैयार करना चाहती है।

प्रस्तावित संशोधन के तहत पूरी तरह परिवार-आधारित व्यवस्था की जगह एक हाइब्रिड मॉडल लाने का प्रस्ताव है, जिसमें प्रति व्यक्ति और प्रति परिवार दोनों आधारों को संतुलित किया जाएगा।

ड्राफ्ट बिल के अनुसार, अंत्योदय अन्न योजना के तहत परिवार के प्रत्येक सदस्य को हर महीने 7 किलोग्राम खाद्यान्न निर्धारित दरों पर मिलेगा। हालांकि, किसी भी एएवाई परिवार को कुल मिलाकर एक महीने में अधिकतम 35 किलोग्राम खाद्यान्न ही दिया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य खाद्यान्न वितरण को लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों के अधिक अनुरूप बनाना है, साथ ही छोटे परिवारों को जरूरत से अधिक लाभ मिलने की स्थिति को भी रोकना है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के दस्तावेज के अनुसार, यह संशोधन समान श्रेणी के लाभार्थियों के बीच प्रति व्यक्ति आधार पर अधिक न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करेगा। साथ ही परिवार के आकार और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप खाद्यान्न का अधिक तर्कसंगत आवंटन संभव होगा। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन से जीवन के हर चरण में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी तथा सभी लाभार्थियों को सम्मानजनक और पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

Leave a Comment