The Dastak 24: फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद स्थित टाउन हॉल पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शहेजान मंसूरी को पुलिस ने 9 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे हिरासत में ले लिया। 10 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक उन्हें मऊ दरवाजा थाने में रखा गया था। उनके समर्थकों के मुताबिक, 12 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया था।
पुलिस ने हिरासत में लेने के पीछे सुरक्षा संबंधी कारण बताए। पुलिस का कहना था कि रात के समय प्रदर्शन स्थल पर शहेजान मंसूरी के साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती थी, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस पर आती। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के लिए अनुमति लेना आवश्यक है।
वहीं, शहेजान मंसूरी का कहना है कि उन्होंने पुलिस से थाने से जाने देने का अनुरोध किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जाने नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, पुलिस ने उन्हें बताया कि वे थाने में सुरक्षित हैं।
शहेजान मंसूरी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर 13 करोड़ 37 लाख वोट काटे जाने के मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए उनके खिलाफ राजनीतिक टिप्पणी भी की।
इसके अलावा, शहेजान मंसूरी और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया और उनकी इंस्टाग्राम आईडी से कुछ वीडियो भी डिलीट किए। इस संबंध में थानाध्यक्ष ने कहा कि भीड़ एकत्रित करने की अपील वाला वीडियो डिलीट किया गया था।
आम आदमी पार्टी के फर्रुखाबाद जिलाध्यक्ष नीरज प्रताप शाक्य ने शहेजान मंसूरी को हिरासत में रखे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया।