Saturday, 03 October 2026 | 4:06 AM
उत्तर प्रदेश

लखीमपुर खीरी : सरस्वती विद्या निकेतन में धूमधाम से मनाई गई बापू और शास्त्री जी की जयंती

सरस्वती विद्या निकेतन इण्टर कॉलेज में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री जी की जयंती राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाई गई।
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लखीमपुर खीरी : सरस्वती विद्या निकेतन में धूमधाम से मनाई गई बापू और शास्त्री जी की जयंती
लखीमपुर खीरी : सरस्वती विद्या निकेतन में धूमधाम से मनाई गई बापू और शास्त्री जी की जयंती
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गोला गोकर्णनाथ: स्थानीय विद्यालय वि॰कु॰स्मा॰ सरस्वती विद्या निकेतन इण्टर कॉलेज में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री जी की जयंती राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाई गई, इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाए उपस्थित रहे। 

कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथि के रूप में डॉ विनोद कुमार वर्मा, वरिष्ठ परामर्शदाता रेडियोलाजिस्ट, जिला चिकित्सालय पीलीभीत ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

विद्यालय प्राचार्य श्री महेन्द्र कुमार त्रिपाठी एवं बालिका विभाग की  प्राचार्या श्रीमती मधु त्रिपाठी एवं मुख्य अतिथि ने माँ सरस्वती  के चित्र का अनावरण एवं पुष्पार्चन कर महापुरुषों को पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिकाए श्रीमती नीरज मिश्रा, श्रीमती अंजना रंजन, श्रीमती अर्चना मिश्रा, श्रीमती वीणा तिवारी एवं श्रीमती अपर्णा दीक्षित ने गाँधी जी  एवं शास्त्री जी के विचारों और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि डॉ विनोद कुमार वर्मा  ने सत्य और अहिंसा के पुजारी, देश की आज़ादी के महानायक राष्ट्रपिता  गाँधी एवं सादगी, सदाचार, शुचिता व कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक लालबहादुर शास्त्री जी के सिद्धांतों को अनुकरण कर व्यवहारिक जीवन में उन्हें अपनाने के लिए शिक्षक एवं शिक्षिकाओ को प्रेरित किया।

इस अवसर पर बालिका विभाग की प्राचार्या श्री मधु त्रिपाठी ने इस अवसर पर महात्मा गांधी के श्रेष्ठ सिद्धान्तों पर प्रकाश डालते हुए  महापुरुषों के जीवन से शिक्षा ग्रहण करने की सलाह दी तथा बताया कि शास्त्री जी के जीवन में धैर्य और संयम की विशेष महत्ता थी। जिस व्यक्ति में सहनशीलता नहीं वह विपरीत परिस्थितियों में टूट जाता है अतः सहनशीलता व्यक्तित्व का सबसे उत्कृष्ट गुण है।

कार्यक्रम  के अंत में विद्यालय के प्राचार्य महेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने शिक्षक एवं शिक्षिकाओ को महात्मा गांधी के संदेश बुरा मत देखो बुरा मत बोलो और बुरा मत सुनो को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया  तथा शास्त्री जी के सादा जीवन उच्च विचार के आदर्श को अपनाने का सुझाव दिया।