Friday, 30 October 2026 | 7:47 PM
उत्तर प्रदेश

गोरखपुर:स्मार्टफोन बच्चों का बचपन छीन रहा है, मुख्यमंत्री योगी की चेतावनी पर गंभीर मंथन जरूरी

गोरखपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 जनवरी 2026 आज के दौर में बच्चों के हाथों में किताबों की जगह स्मार्टफोन आ जाना एक गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। इसी चिंता को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान बेहद अहम और सटीक बात कही। उन्होंने कहा—"मैं देखता हूँ
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गोरखपुर:स्मार्टफोन बच्चों का बचपन छीन रहा है, मुख्यमंत्री योगी की चेतावनी पर गंभीर मंथन जरूरी

गोरखपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 जनवरी 2026 आज के दौर में बच्चों के हाथों में किताबों की जगह स्मार्टफोन आ जाना एक गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। इसी चिंता को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान बेहद अहम और सटीक बात कही। उन्होंने कहा—"मैं देखता हूँ छोटे-छोटे बच्चों को लोग स्मार्टफोन पकड़ा देते हैं… मत करिए ये… अपराध है ये… बच्चे को लिखने-पढ़ने की आदत डलवाइये… स्मार्टफोन पकड़ लेगा तो बच्चा ज़िद्दी हो जाएगा, डिप्रेशन का शिकार हो जाएगा।"

मुख्यमंत्री का यह बयान आज के समाज को आईना दिखाने वाला है। दरअसल, स्मार्टफोन बच्चों के जीवन में इस कदर घुस चुका है कि वह उनका बचपन, मासूमियत और रचनात्मक सोच छीनता जा रहा है। खेल-कूद, किताबें, दोस्तों के साथ बातचीत और परिवार के साथ समय बिताने की जगह अब स्क्रीन ने ले ली है।

विशेषज्ञों की मानें तो कम उम्र में अत्यधिक मोबाइल उपयोग से बच्चों में चिड़चिड़ापन, जिद, एकाग्रता की कमी, नींद की समस्या और अवसाद (डिप्रेशन) जैसी मानसिक परेशानियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चे आभासी दुनिया में तो सक्रिय रहते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन से कटते जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कहना कि बच्चों को लिखने-पढ़ने की आदत डालनी चाहिए, आज के माता-पिता के लिए एक स्पष्ट संदेश है। स्मार्टफोन को बच्चों को चुप कराने का साधन बना देना आसान जरूर है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बेहद खतरनाक हैं।

आज के आधुनिक मॉम और डैड अगर मुख्यमंत्री की इस चेतावनी को गंभीरता से लें और बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर किताबों, खेल और संस्कारों से जोड़ें, तो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर हो सकता है।

स्मार्टफोन सुविधा है, लेकिन बच्चों के लिए लत बन जाए तो खतरा। अब भी समय है—बचपन को मोबाइल से नहीं, मूल्यों से जोड़िए।