जानकारी के अनुसार, श्रीपाल पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उपचार के लिए वह भरखा चौराहे स्थित एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे। बताया गया कि वहां संचालक ने उन्हें इंजेक्शन लगाया। घर लौटने के कुछ देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।
इंजेक्शन लगाने और मौत के बीच समय का अंतर सामने आया है, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मौत का कारण इंजेक्शन था या पहले से चल रही बीमारी अथवा कोई अन्य चिकित्सकीय वजह। वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
घटना की सूचना मिलने पर राजेपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए फतेहगढ़ स्थित मोर्चरी हाउस भेज दिया।
राजेपुर थाने के दरोगा अरविंद अवस्थी के अनुसार, श्रीपाल पहले से बीमार थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मौत के वास्तविक कारणों का पता रिपोर्ट आने के बाद चलेगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
घटना के बाद मेडिकल स्टोर संचालक के दुकान बंद कर फरार होने की जानकारी सामने आई है। उसकी तलाश किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, संचालक की भूमिका और इंजेक्शन से संबंधित परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस घटना ने मेडिकल स्टोर पर उपचार और इंजेक्शन लगाए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी