क्या मोदी-शाह ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ को चरितार्थ कर रहे हैं?
नरेंद्र मोदी के भाषण पहेली बनते जा रहे हैं. समझ नहीं आ रहा है कि वे चुनाव को ले कर घबराए हुए हैं या अपने को जीता मान बैठ इस आत्मविश्वास में हैं कि वे कुछ भी बोलें लेकिन उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा. हां, विरोधी नेताओं को जेल में डालने, राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर वन कहने, कांग्रेस उनको मरवा देना चाह र