फर्रुखाबाद:आलू किसानों के हक के लिए 7 सितंबर को होगा व्यापक आंदोलन, सातनपुर मंडी से जिला मुख्यालय तक कूच

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 20 अगस्त 2026 आलू किसानों की समस्याओं, कृषि नीति बनाए जाने और लागत के अनुरूप आलू का भाव दिलाए जाने की मांग को लेकर आगामी 7 सितंबर को जनपद में व्यापक किसान आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन की घोषणा गुरुवार को एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडियों में शामिल सातनपुर आलू मंडी में आयोजित ‘आलू किसान बचाओ’ बैठक में किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष अजय अनमोल ने की।

बैठक को संबोधित करते हुए अजय अनमोल ने कहा कि यह पहली बार है जब किसान, आलू आढ़ती और शीतगृह मालिक एक मंच पर आकर आलू किसानों की समस्या के समाधान के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फर्रुखाबाद में एक बड़ा फैसला होने जा रहा है और आने वाले समय में इसे पूरा देश देखेगा।

उन्होंने आलू किसानों की मौजूदा स्थिति के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि किसानों को उनकी लागत के अनुपात में आलू का उचित मूल्य मिले तो उन्हें शीतगृहों का भंडारण शुल्क देने में कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आलू के दाम बढ़ने पर आढ़तियों की आमदनी बढ़ती है और किसानों की खरीदारी से जिले के बाजारों में भी रौनक आती है। इसलिए आलू मंदी की समस्या केवल किसानों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की लड़ाई है।

‘कृषि प्रधान देश में आज तक कृषि नीति नहीं बनी’

अजय अनमोल ने कहा कि कृषि प्रधान देश में आज तक प्रभावी कृषि नीति का न बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़े पुराने कानूनों और व्यवस्थाओं में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है।

उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि प्रदेश के करीब 10 जिलों के आलू किसान एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे तो सरकार को किसानों की बात सुननी पड़ेगी। उन्होंने किसानों से आंदोलन को सफल बनाने के लिए तन-मन-धन से सहयोग करने की अपील की।

सरकार से रखीं कई प्रमुख मांगें

अजय अनमोल ने सरकार से 500 रुपये में आलू का पैकेट खरीदने, 500 रुपये से कम कीमत पर आलू बिकने की स्थिति में किसानों को अंतर की भरपाई करने, शीतगृहों में भंडारित आलू का भाड़ा शुल्क सरकार द्वारा वहन करने, मंडी में आलू पर लगने वाले टैक्स को समाप्त करने तथा रेल मंत्री से आलू की ढुलाई के लिए मुफ्त रेलवे वैगन उपलब्ध कराने की मांग की।

उन्होंने प्रदेश सरकार की भामाशाह योजना पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कृषि मंत्री द्वारा 22 लाख टन आलू खरीदने की घोषणा की गई थी, लेकिन किसानों से एक किलो तक आलू की खरीद नहीं हुई।

7 सितंबर को सातनपुर मंडी से जिला मुख्यालय तक मार्च

बैठक में तय किया गया कि 7 सितंबर को किसान, आढ़ती और शीतगृह मालिक सातनपुर मंडी में एकत्र होंगे और वहां से जिला मुख्यालय के लिए रवाना होंगे। अजय अनमोल ने आंदोलन में शामिल लोगों से आलू की मालाएं पहनकर विरोध दर्ज कराने की भी अपील की।

उन्होंने शीतगृह मालिक मनोज उर्फ पप्पू रस्तोगी से मालाओं के लिए आलू उपलब्ध कराने, आढ़ती राय सिंह से 20 ट्रैक्टर तथा आढ़ती राम लडैते राजपूत से 50 आलू आढ़तियों को आंदोलन में शामिल कराने का आह्वान किया। उन्होंने आंदोलन के लिए 51 हजार रुपये सहयोग देने की घोषणा करते हुए कहा कि वह आंदोलन को सफल बनाने के लिए पूरा समय देंगे।

लागत के हिसाब से भाव मिलने की मांग

आलू किसान आंदोलन के प्रभारी अशोक कटियार ने कहा कि किसानों को हर हाल में उनकी लागत के हिसाब से आलू का भाव मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के कार्यक्रम से राजनीतिक दलों में भी हलचल पैदा हो गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार कम कीमत वाले आलू को खरीदकर गौशालाओं में पशुओं के लिए इस्तेमाल करे।

प्रमुख आलू निर्यातक सुधीर शुक्ला ने प्रदेश सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया। वहीं आलू आढ़ती परशुराम वर्मा ने अधिक उत्पादन के चलते आलू फेंकने की नौबत आने की बात कही। उन्होंने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और पशुपालन पर भी ध्यान देने की सलाह दी।

शीतगृह मालिक मनोज उर्फ पप्पू रस्तोगी ने सरकार से आलू को बर्बाद होने से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। छिबरामऊ के किसान अच्छे खां ने भी किसानों और शीतगृह मालिकों से आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।

बैठक में शीतगृह मालिक ओमकार सिंह यादव, अंशुल कटियार, प्रगतिशील किसान नारद कश्यप, व्यापारी नेता सर्वेश अग्रवाल, सुभाष कश्यप सहित अन्य लोगों ने आलू किसानों की समस्याओं पर चिंता जताई और आंदोलन के माध्यम से किसानों का हक दिलाने की बात कही।

कार्यक्रम का संचालन आलू आढ़ती राम लडैते राजपूत ने किया। इस दौरान प्रवीन कटियार, राजेश गुप्ता, अंशुल कटियार, सुरेंद्र सिंह पाल, कमलेश राजपूत, अरविन्द राजपूत, बेचेलाल वर्मा, हरि नारायण यादव, राजेश सिंह प्रधान, सुरजीत कटियार प्रधान, अरविन्द गंगवार, हरिश्चंद्र राजपूत, नंद किशोर वर्मा, बृजपाल सिंह शाक्य, परशुराम वर्मा, देवेश चतुर्वेदी समेत बड़ी संख्या में किसान, आढ़ती, व्यापारी और शीतगृह मालिक मौजूद रहे।

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