लखीमपुर खीरी : पति की लंबी आयु के लिए सुहागिनों ने की वट सावित्री पूजा

गोला गोकर्णनाथ : (द दस्तक 24 न्यूज) गोला नगर में वट सावित्री पूजा स्थलों पर शनिवार को नगर पालिका परिषद अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू द्वारा सभी पूजा स्थलों पर साफ सफाई सहित बैठने की उत्तम व्यवस्था और भीषण गर्मी को देखते हुए शीतल पेयजल व शर्बत की व्यवस्था की गई जिससे माताओं बहनों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इस बात का ध्यान रखते हुए अध्यक्ष ने सभी पूजा स्थलों सेठानी हाता, मां मंगला देवी मंदिर,फूलबाबा आश्रम, दुर्गा मंदिर, त्रिलोक गिरि मंदिर सहित कई पूजा स्थलों का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष ने सभी नारी शक्तियों को वट सावित्री पूजा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दी।

वट सावित्री पूजा स्थलों पर सुहागिन महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सुहागिनों ने अपने सुहाग की दीर्घायु एवं उनकी मंगल कामना के लिए वट सावित्री की पूजा की। महिलाओं ने सुबह से ही विभिन्न मंदिरों में पहुंचकर वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना की तथा अपने पति की लंबी आयु एवं परिवार की मंगल कामना के लिए वट वृक्ष की परिक्रमा कर धागा बांधा साथ ही पूजा-अर्चना करने के उपरांत महिलाओं ने वट सावित्री व्रत संपन्न किया। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन वट सावित्री की पूजा की जाती है इस दिन सुहागिन महिलाओं द्वारा उपवास रखा जाता है जो बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री व्रत को करवा चौथ जितना ही महत्वपूर्ण बताया गया है। इस दौरान वट वृक्ष के नीचे सावित्री सत्यवान और यमराज की मूर्ति स्थापित की जाती है। इसके बाद वट वृक्ष की जड़ों और मूर्तियों पर जल अर्पित किया जाता है साथ ही फूल, धूप और मिठाई से पूजा और कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की 7 बार परिक्रमा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री अपने मृत पति सत्यवान के प्राण को यमराज से वापस छीन लाई थीं। तब से विवाहित महिलाएं हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री का व्रत रखकर पूजा अर्चना करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।