फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 मई 2026 ग्राम चिलसरी, पोस्ट बरझाला तहसील कायमगंज, जिला फर्रुखाबाद की पावन धरती उस समय एक आध्यात्मिक तीर्थ में परिवर्तित हो गई, जब यहां 20वें भव्य बौद्ध मेले का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भावनात्मक माहौल के बीच संपन्न हुआ। चारों ओर “नमो बुद्धाय” और “जय भीम” के जयघोष गूंज रहे थे, जिससे वातावरण पूरी तरह से भगवान बुद्ध के संदेशों से आलोकित हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हर हृदय में शांति, करुणा और भाईचारे की एक नई ज्योति प्रज्वलित हो गई हो।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 11:00 बजे बुद्ध वंदना से हुई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. धम्मपाल मैथ्यूरे ने की। भिक्षु धम्मकीर्ति थेरा, अशघोष मैथ्यूरे, संघ तीर्थ और आनंद भिक्षु द्वारा की गई वंदना ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। जब धम्म देशना के माध्यम से करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया गया, तो वहां उपस्थित अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। हर कोई इन विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेता नजर आया।
मेला उद्घाटन: उत्साह और श्रद्धा का संगम
मेले का शुभ उद्घाटन कायमगंज विधायक डॉ. सुरभि गंगवार द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्मवीर जी एवं उनकी धर्मपत्नी गीता शाक्य ने की। इस अवसर पर मेला समिति के समर्पित सदस्य—सुखराम शाक्य, वतन गंगवार, राहुल शाक्य, संतोष शाक्य, लड़ायते लाल उत्तम ,सरदार सिंह शाक्य, इंद्रजीत ,प्रधानमंगली, संघदीप, विजय शाक्य, फूलसिंह, शिवम शाक्य, पुरुषोत्तम, हरिओम शाक्य एवं परमानंद शाक्य—की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य, नागेंद्र शाक्य, इंजीनियर देवेंद्र शाक्य, इंजीनियर दयानंद गौतम, सेठ रामौतार, अवनीश शाक्य एवं अवधेश शाक्य उपस्थित रहे।
विचारों ने छुआ हर दिल
मुख्य अतिथि सुशील शाक्य ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य का मार्गदर्शन है। उन्होंने कहा कि यदि समाज बुद्ध के सिद्धांतों को अपनाए, तो हर व्यक्ति के जीवन में शांति और संतुलन स्थापित हो सकता है।
कर्मवीर जी ने अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि “बुद्ध का मार्ग हमें सिखाता है कि जीवन की कठिनाइयों में भी धैर्य और करुणा का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।” उनके इन शब्दों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
मंच संचालक आचार्य गिरीश बाबू धम्मदर्शी ने कहा कि आज के तनावपूर्ण और भौतिकवादी युग में भगवान बुद्ध के विचार ही हमें सच्ची शांति और संतुलन प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे बुद्ध के मार्ग पर चलकर अपने जीवन और समाज को बेहतर बनाएं।
मेले की रौनक: हर चेहरे पर मुस्कान
मेले में तरह-तरह की दुकानें सजी हुई थीं, जो इस आयोजन की रौनक को और बढ़ा रही थीं। खिलौनों, कपड़ों, मिठाइयों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। बच्चे जहां रंग-बिरंगे खिलौनों और झूलों का आनंद ले रहे थे, वहीं महिलाएं अपनी जरूरत की वस्तुएं खरीदने में व्यस्त थीं। बुजुर्ग और नौजवान भी पूरे उत्साह के साथ मेले का आनंद ले रहे थे।
हर वर्ग, हर आयु के लोग इस मेले में शामिल होकर न केवल खरीदारी कर रहे थे, बल्कि एक-दूसरे के साथ खुशियां भी बांट रहे थे। यह दृश्य सामाजिक एकता और भाईचारे की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहा था।
रात्रि में सजी बुद्ध की भव्य झांकी
जैसे-जैसे शाम ढलकर रात में परिवर्तित हुई, मेले की रौनक और भी बढ़ गई। रात्रि के समय भगवान बुद्ध की भव्य झांकी का आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को और भी दिव्य बना दिया। आकर्षक रोशनी, सजीव सजावट और मधुर संगीत के बीच प्रस्तुत की गई यह झांकी मानो भगवान बुद्ध के जीवन की झलक दिखा रही थी।
झांकी को देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़ पड़े। छोटे-बड़े, महिलाएं, बुजुर्ग सभी मंत्रमुग्ध होकर इस दृश्य को निहार रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो इतिहास सजीव हो उठा हो और भगवान बुद्ध स्वयं अपने संदेशों के साथ लोगों के बीच उपस्थित हों।
एक मेला, जो दिलों में बस गया
यह 20वां बौद्ध मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बन गया, जिसने हर व्यक्ति के दिल को गहराई से छू लिया। यहां से लौटते समय लोगों के चेहरों पर एक नई शांति, एक नई सोच और एक नई उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी।
अंत में भगवान बुद्ध के संदेश को स्मरण करते हुए—“घृणा से घृणा कभी समाप्त नहीं होती, प्रेम ही उसका अंत करता है।”
ग्राम चिलसरी का यह आयोजन न केवल सफल रहा, बल्कि हर व्यक्ति के हृदय में एक अमिट छाप छोड़ गया।
