भारत की इस जीत में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों का शानदार तालमेल देखने को मिला। टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने जबरदस्त शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए 129 रन की रिकॉर्ड साझेदारी की। शेफाली वर्मा ने आक्रामक अंदाज में 68 रन बनाए, जबकि स्मृति मंधाना ने शानदार 59 रन की पारी खेली।
भारतीय सलामी बल्लेबाजों की इस साझेदारी ने श्रीलंकाई गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बना दिया। शेफाली ने महज 24 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जो महिला एशिया कप के टी20 इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक बताया गया है। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 183 रन बनाए और पांच विकेट गंवाए। इसके बाद 184 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। श्री चरणी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए, जबकि दीप्ति शर्मा ने तीन विकेट लेकर श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। श्रीलंका की पूरी टीम 111 रन पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 72 रन से अपने नाम कर लिया।
अब इस जीत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 2024 के महिला एशिया कप फाइनल में श्रीलंका ने भारत को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम किया था। इस बार भारतीय टीम ने उसी श्रीलंका को फाइनल में हराकर एशिया कप की ट्रॉफी वापस हासिल कर ली।
महिला क्रिकेट में भारत की यह सफलता केवल एक ट्रॉफी की जीत नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें भारतीय महिला खिलाड़ी अब विश्व क्रिकेट के सबसे बड़े मंचों पर लगातार अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं का संतुलन भारतीय क्रिकेट के मजबूत भविष्य की उम्मीद जगाता है।
एशिया कप में भारत की यह आठवीं खिताबी सफलता बताती है कि महाद्वीपीय महिला क्रिकेट में भारतीय टीम का दबदबा कितना मजबूत है। 2026 का यह खिताब भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को और बढ़ाएगा तथा आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम को नई ऊर्जा देगा।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह जीत देश की उन लाखों बेटियों के लिए भी प्रेरणा है, जो खेल के मैदान में अपने सपनों को नई उड़ान देना चाहती हैं।