प्रयागराज:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर लगाई रोक, सरकार का फैसला असंवैधानिक करार

प्रयागराज:(द दस्तक 24 न्यूज़) 26 जून 2026 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस निर्णय को असंवैधानिक मानते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

यह आदेश न्यायालय ने अरविंद राठौर द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ता ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाए जाने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती दी थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का पांच वर्षीय कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था। प्रदेश में 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के कारण राज्य सरकार ने वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी थी। इसी निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश की ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर नई स्थिति उत्पन्न हो गई है। अब यह सवाल उठने लगा है कि पंचायतों का संचालन किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव की संभावित तिथि बताने को भी कहा है। साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

पंचायत चुनाव में हो सकती है देरी

उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही पंचायत चुनावों में आरक्षण निर्धारण के लिए ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दे चुकी है। आयोग प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या और उनकी सामाजिक स्थिति का अध्ययन करेगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायतों में आरक्षण तय किया जाएगा। ऐसे में पंचायत चुनाव लगभग छह माह तक टलने की संभावना जताई जा रही है।

12.58 करोड़ से अधिक मतदाता करेंगे मतदान

हाल ही में पंचायत चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची भी जारी की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए कुल 12 करोड़ 58 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। इस बार मतदाता सूची में करीब 1.81 करोड़ नए मतदाताओं को शामिल किया गया है।

अब सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पंचायत चुनाव की दिशा और समयसीमा तय हो सकती है।

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