फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 17 अगस्त 2026 कायमगंज तहसील क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पचरौली महादेवपुर निवासी बुजुर्ग मालिखान सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें सरकारी अभिलेखों में मृत दर्शाकर उनकी करीब 25 बीघा कृषि भूमि पर फर्जी तरीके से विरासत दर्ज करा दी गई और जमीन हड़प ली गई। पीड़ित ने तहसील समाधान दिवस में पहुंचकर अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच और जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
कागजों में मृत दिखाने का आरोप
मालिखान सिंह का आरोप है कि कुछ दबंगों ने ग्राम सचिव, लेखपाल और कानूनगो से कथित सांठगांठ कर उन्हें अभिलेखों में मृत दर्शा दिया। इसके बाद कथित रूप से फर्जी परिवार रजिस्टर तैयार कराया गया और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर उसकी आड़ में जमीन की विरासत दर्ज करा दी गई। पीड़ित के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया के जरिए करीब 25 बीघा कृषि भूमि दूसरे लोगों के नाम कर दी गई।
बेटे के खाद लेने पहुंचने पर खुला मामला
बताया गया कि मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मालिखान सिंह का बेटा खेत में डालने के लिए खाद लेने पहुंचा। जमीन के रिकॉर्ड की जानकारी करने पर पता चला कि खतौनी में संबंधित भूमि उनके परिवार के नाम दर्ज नहीं है। इसके बाद परिजनों ने अभिलेखों की पड़ताल की तो कथित रूप से जमीन के नामांतरण और विरासत दर्ज किए जाने का मामला सामने आया।
इसके बाद बुजुर्ग मालिखान सिंह स्वयं अधिकारियों के सामने पहुंचे और अपनी मौजूदगी साबित करते हुए कहा कि उन्हें जीवित होने के बावजूद कागजों में मृत दर्शा दिया गया है।
समाधान दिवस में लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित ने सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों और कथित फर्जी वसीयत के आधार पर उनकी जमीन पर कब्जा किया गया है। पीड़ित ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन को उनके नाम वापस दर्ज कराने की मांग की है।
एसडीएम ने जांच का दिया भरोसा
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम कायमगंज ने मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राजस्व अभिलेखों में बुजुर्ग को मृत किस आधार पर दर्ज किया गया और करीब 25 बीघा जमीन की विरासत किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुई।
नोट: यह समाचार पीड़ित द्वारा तहसील समाधान दिवस में लगाए गए आरोपों और दी गई शिकायत पर आधारित है। मामले की प्रशासनिक जांच की जानी है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदार लोगों के संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
