फर्रुखाबाद:संकिसा में 1.13 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक बुद्ध विहार परिसर, आठ कमरों का हुआ शिलान्यास

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 जून 2026 जनपद के विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल संकिसा में 14 जून 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा स्वीकृत 1.13 करोड़ रुपये की लागत से धम्मालोकों बुद्ध विहार परिसर में आठ कमरों के निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन एवं शिलान्यास संपन्न हुआ। यह परियोजना देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

भूमि पूजन कार्यक्रम धम्मालोकों बुद्ध विहार के संस्थापक कर्मवीर शाक्य, रामसेवक शाक्य, विहार सेवा ट्रस्ट के उपप्रबंधक रघुवीर सिंह, इंजीनियर रामाशीष तथा सुपरवाइजर वीरेंद्र चौधरी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भंते प्रज्ञानंद एवं भंते आनंद कीर्ति ने बौद्ध मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि संकिसा बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नई आवासीय सुविधाओं का निर्माण क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा।

बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में कर्मवीर शाक्य की महत्वपूर्ण भूमिका

संकिसा में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कर्मवीर शाक्य का योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्होंने भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया है। धम्मालोकों बुद्ध विहार की स्थापना और उसके विकास में उनके प्रयासों ने संकिसा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

सत्यप्रकाश अग्रवाल का योगदान भी रहा महत्वपूर्ण

संकिसा के विकास में समाजसेवी सत्यप्रकाश अग्रवाल की भूमिका भी विशेष रूप से सराहनीय रही है। उन्होंने अशोक स्तंभ के निर्माण और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए एक विशाल भवन का निर्माण कराकर इस पवित्र स्थल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके प्रयासों ने संकिसा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को और मजबूत किया है।

विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल है संकिसा

बौद्ध परंपरा के अनुसार भगवान बुद्ध अपनी माता महामाया को धर्मोपदेश देने के लिए स्वर्गलोक गए थे और तीन माह बाद पृथ्वी पर संकिसा में अवतरित हुए थे। यही कारण है कि यह स्थान बौद्ध धर्म में अत्यंत पवित्र और श्रद्धा का केंद्र माना जाता है।

इतिहासकारों के अनुसार सम्राट अशोक ने भी संकिसा की महत्ता को देखते हुए यहां स्तंभ और अनेक स्मारकों का निर्माण कराया था। अशोक स्तंभ का हाथी शीर्ष आज भी यहां के गौरवशाली अतीत का प्रतीक बना हुआ है। चीन के प्रसिद्ध यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्राओं के दौरान संकिसा का उल्लेख किया था, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता प्रमाणित होती है।

सड़क निर्माण से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य के प्रयासों से संकिसा से अचरा तक सड़क निर्माण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है। सड़क बनने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

संकिसा बना शांति और करुणा का वैश्विक संदेशवाहक

आज संकिसा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानव कल्याण के संदेश का जीवंत केंद्र बन चुका है। हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी श्रद्धालु यहां पहुंचकर बौद्ध संस्कृति और इतिहास से जुड़ते हैं। नवीन निर्माण परियोजनाओं और विकास कार्यों के माध्यम से संकिसा को वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान मिलने की उम्मीद है।

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