चौधरी चरण सिंह…कौन थे, आइये उनके कुछ किस्से सुनाता हूँ
बात 1979 की है। शाम के 6 बजे थे। इटावा के ऊसराहार थाने में धोती-कुर्ता पहने एक किसान पहुंचा। माथे पर आए पसीने को पोछते हुए उसने सिपाही से कहा- साहब बैल चोरी की रपट लिखवानी है। सिपाही ने इंतजार करने को कहा। बैठे-बैठे 1 घंटा बीत गया, तो किसान ने फिर से रपट लिखने की गुहार लगाई। सिपाही ने अनसुना कर दिया