फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 13 अगस्त 2026 अमृतपुर तहसील मुख्यालय पर गुरुवार को उस समय प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई, जब उच्च प्राथमिक विद्यालय बिरसिंहपुर, विकासखंड राजेपुर के कक्षा 6 से 8 तक के करीब 100 छात्र-छात्राएं अपनी प्रधानाचार्य नीलम राठौर के समर्थन में तहसील पहुंच गए। बच्चों ने एसडीएम कार्यालय के पास शिक्षिका के समर्थन में नारेबाजी करते हुए अपनी बात प्रशासन के सामने रखी।
ट्रैक्टर-ट्रॉली से बच्चों को लाने पर एसडीएम नाराज
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब एसडीएम अमृतपुर श्वेता साहू को जानकारी हुई कि बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से तहसील लाया गया है। एसडीएम ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्रशासन का मानना है कि बच्चों को इस तरह जोखिम में डालकर कहीं ले जाना गंभीर विषय है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में यह पता लगाया जा रहा है कि उन्हें तहसील तक लाने की पहल किसने की तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था किस स्तर से की गई।
बच्चों ने कहा- अपनी मर्जी से आए, प्रधान पर लगाए आरोप
तहसील पहुंचे बच्चों ने प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें किसी ने जबरदस्ती नहीं भेजा, बल्कि वे अपनी शिक्षिका के समर्थन में स्वयं आए हैं। हाउस कैप्टन तान्या, आदर्श और वाइस कैप्टन तनु की अगुवाई में बच्चों ने अपनी प्रधानाचार्य के प्रति समर्थन जताया।
बच्चों ने ग्राम प्रधान पर प्रधानाचार्य को कथित रूप से ब्लैकमेल किए जाने का आरोप भी लगाया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस दौरान बीडीसी सदस्य रंजीत सिंह उर्फ लल्ला समेत कई अभिभावक और ग्रामीण भी मौजूद रहे।
BSA ने दी सख्त चेतावनी
फर्रुखाबाद के बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ सिंह ने कहा कि विभाग को बिना पूर्व सूचना दिए बच्चों को इस तरह तहसील मुख्यालय लाना गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी शिक्षक अथवा विद्यालय के रसोइयों की संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
प्रशासन ने फिलहाल बच्चों को सुरक्षित वापस भेज दिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
बच्चों का शिक्षिका के प्रति समर्थन बना चर्चा का विषय
हालांकि बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से तहसील लाना निश्चित रूप से सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर सवाल खड़े करता है, लेकिन जिस तरह करीब 100 बच्चे अपनी शिक्षिका के समर्थन में एक साथ तहसील पहुंच गए, उसने शिक्षिका और विद्यार्थियों के बीच संबंधों को भी चर्चा में ला दिया है।
यदि बच्चे वास्तव में अपनी इच्छा से अपनी प्रधानाचार्य के समर्थन में सामने आए हैं तो यह भी जांच का विषय है कि शिक्षिका का विद्यार्थियों के साथ ऐसा जुड़ाव कैसे बना। संभव है कि शिक्षिका ने बच्चों की शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए ईमानदारी से मेहनत की हो, जिसका प्रभाव विद्यार्थियों के व्यवहार में दिखाई दे रहा हो।
वहीं, ग्राम प्रधान द्वारा शिक्षिका को कथित रूप से ब्लैकमेल किए जाने के आरोप भी गंभीर हैं। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि यदि शिक्षिका के साथ किसी प्रकार का अन्याय या दबाव बनाया जा रहा है तो उन्हें न्याय मिल सके।
फिलहाल पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों को तहसील लाने की वास्तविक पहल किसने की, ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था कैसे हुई और शिक्षिका द्वारा लगाए गए अथवा उनके समर्थन में बच्चों द्वारा बताए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
