फर्रुखाबाद में जन्म प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा विवाद, ग्राम सचिव व ब्लॉक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप

फर्रुखाबाद(द दस्तक 24 न्यूज़) 29 जून 2026 जनपद के विकासखंड बढ़पुर क्षेत्र के ग्राम धन्सुआ निवासी राजकुमार प्रजापति ने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कर ग्राम सचिव, बीडीओ और अन्य ब्लॉक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल जारी न करने, भ्रष्टाचार, फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार करने तथा पूरे परिवार का मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया है।

बच्चों के भविष्य पर संकट, कई महीनों से नहीं बने जन्म प्रमाण पत्र।

शिकायतकर्ता राजकुमार प्रजापति पुत्र रामसनेही प्रजापति निवासी ग्राम धन्सुआ, पोस्ट सेंट्रल जेल, जिला फर्रुखाबाद ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों के स्कूल में प्रवेश के लिए 3 मार्च को विकासखंड बढ़पुर में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने हेतु सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे।

आरोप है कि आवेदन जमा होने के एक महीने बाद भी ग्राम सचिव कंचन रावत द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। न तो संबंधित दस्तावेज कार्यालय से उठाए गए और न ही ग्राम पंचायत कार्यालय में उनकी उपस्थिति रही। शिकायतकर्ता का कहना है कि ग्राम सचिव ने फोन तक उठाना बंद कर दिया।

आईजीआरएस शिकायत के बाद बढ़ी रंजिश

प्रार्थी का आरोप है कि जब बच्चों के भविष्य को देखते हुए उसने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, तो ग्राम सचिव ने नाराज होकर कहा कि अब किसी भी कीमत पर जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनाए जाएंगे और जहां शिकायत करनी हो कर लो।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद से अधिकारियों का रवैया और अधिक प्रतिकूल हो गया।

भ्रष्टाचार और पक्षपात के गंभीर आरोप

राजकुमार प्रजापति ने आरोप लगाया है कि ग्राम सचिव द्वारा गांव के अन्य बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र कथित रूप से धन लेकर जारी किए गए, जबकि उनके बच्चों के प्रमाण पत्र जानबूझकर रोके गए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब इस मामले की शिकायत बीडीओ योगेश पांडे से की गई, तो निष्पक्ष जांच कराने के बजाय संबंधित अधिकारियों का बचाव किया गया और शिकायतकर्ता को चुप रहने की सलाह दी गई।

गवाहों को धमकाने और फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि ग्राम सचिव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहू और एएनएम पर दबाव बनाया तथा नौकरी से हटाने की धमकी देकर उनसे जबरन बयान लिखवाए।

प्रार्थी का आरोप है कि इन कर्मचारियों से यह लिखवाया गया कि उनके छहों बच्चों का जन्म गांव में नहीं हुआ, जबकि इसके समर्थन में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं था।

जांच में भी अनियमितता के आरोप

आईजीआरएस और जिलाधिकारी से शिकायत के बाद एडीओ पंचायत ओम पांडे द्वारा दो बार जांच की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच के दौरान पड़ोसियों और ग्रामीणों ने बच्चों का जन्म घर पर होने की पुष्टि की, लेकिन इसके बावजूद जांच अधिकारी ने कथित रूप से ग्राम सचिव के पक्ष में रिपोर्ट भेजी।

प्रार्थी का आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद बार-बार वही पुरानी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती रही।

सीडीओ के आदेश के बाद भी नहीं हुआ समाधान

शिकायत के अनुसार, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच और सही साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद मातहत अधिकारियों ने पुरानी रिपोर्ट ही एसडीएम कार्यालय भेज दी।

इसके बाद एसडीएम द्वारा नियमानुसार ब्लॉक से अनुपलब्धता प्रमाण पत्र (Non-Availability Certificate) उपलब्ध कराने को कहा गया, जिस पर शिकायतकर्ता ने सहमति जताई।

राजकुमार प्रजापति ने बताया कि सीडीओ के निर्देशानुसार उन्होंने 15 जून 2026 को शपथ पत्र के साथ परिवार रजिस्टर में बच्चों के नाम दर्ज कराने हेतु नया आवेदन भी दिया, लेकिन उस पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आरटीआई में जानकारी न देने का आरोप

शिकायतकर्ता ने ग्राम सचिव के कार्यकाल में जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र, स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालयों तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित सूचनाएं सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी थीं।

उनका आरोप है कि योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और इन्हें छिपाने के उद्देश्य से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

मानसिक उत्पीड़न से परिवार परेशान

राजकुमार प्रजापति ने मानवाधिकार आयोग को भेजी गई शिकायत में कहा है कि अधिकारियों के रवैये के कारण उनका पूरा परिवार कई महीनों से मानसिक तनाव और उत्पीड़न का सामना कर रहा है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे राष्ट्रपति के समक्ष इच्छा मृत्यु की मांग करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

मानवाधिकार आयोग से की गई प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने राज्य मानवाधिकार आयोग से निम्नलिखित मांगें की हैं—ग्राम सचिव कंचन रावत, बीडीओ योगेश पांडे एवं एडीओ पंचायत ओम पांडे के खिलाफ उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल तत्काल जारी कराई जाए।

शिकायतकर्ता और उसके परिवार को सुरक्षा एवं न्याय उपलब्ध कराया जाए।

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