हरदोई:टूटा था केवल पैर, फिर कैसे चली गई जान? महेन्द्र कुशवाह की मौत ने खड़े किए स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

हरदोई:(द दस्तक 24 न्यूज़) 19 जून 2026 जनपद के ग्राम खेतुई निवासी महेन्द्र कुशवाह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, 15 जून 2026 को पैर टूटने के बाद उपचार के लिए भर्ती कराए गए महेन्द्र कुशवाह की कुछ ही घंटों में मौत हो गई। अब परिवार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

पैर के फ्रैक्चर से शुरू हुआ मामला

परिजनों के अनुसार, महेन्द्र कुशवाह को पैर में चोट लगने के बाद उपचार के लिए गहलौत नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि भर्ती के समय मरीज पूरी तरह होश में था और सामान्य बातचीत कर रहा था। अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन की तैयारी बताते हुए 20 हजार रुपये जमा कराए। पहले ऑपरेशन का समय रात 12 बजे बताया गया, बाद में इसे बदलकर सुबह 4 बजे कर दिया गया।

परिवार का सवाल है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं कि एक पैर के फ्रैक्चर का इलाज कराने पहुंचे व्यक्ति की कुछ ही घंटों में मौत हो गई।

अस्पताल की भूमिका पर उठ रहे सवाल

परिजनों का आरोप है कि यदि अस्पताल मरीज का समुचित इलाज करने में सक्षम नहीं था तो उसे भर्ती क्यों किया गया? ऑपरेशन के नाम पर धनराशि क्यों जमा कराई गई? और कई घंटे अस्पताल में रखने के बाद अचानक सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह क्यों दी गई?

घटना के बाद सामने आए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। परिवार का कहना है कि अस्पताल कर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मृत अवस्था में ही मरीज को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाने का प्रयास दिखाया और बाद में गांव छोड़ दिया। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जांच और कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक न तो किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई है और न ही मामले की निष्पक्ष जांच शुरू हुई है। इसी कारण परिवार और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

परिजनों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की न्यायिक अथवा उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, ऑपरेशन से जुड़े रिकॉर्ड, डॉक्टरों की ड्यूटी रजिस्टर, उपचार संबंधी दस्तावेजों और एम्बुलेंस की गतिविधियों की जांच की जाए।

निजी नर्सिंग होमों की निगरानी पर भी सवाल

यह मामला प्रदेश में संचालित निजी नर्सिंग होमों की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि कई निजी अस्पताल पर्याप्त संसाधनों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आवश्यक मानकों के बिना संचालित हो रहे हैं। ऐसे मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा सच

महेन्द्र कुशवाह की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा केवल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही संभव है। यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो तथ्य भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक टूटे पैर के इलाज के लिए भर्ती कराया गया व्यक्ति कुछ ही घंटों में मृत कैसे हो गया। हरदोई की जनता और पीड़ित परिवार इस प्रश्न का जवाब चाहते हैं और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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