। मिश्रित, सीतापुर / विकासखंड मिश्रित से खंडविकास अधिकारी सुनील कुमार कौशल का स्थानांतरण होने के बाद से ग्राम पंचायत जसरथपुर में तैनात पंचायत सचिव केशव राना की कार्य शैली क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है । उन पर सरकारी कार्यों के संचालन में निजी मुंशियों का सहारा लेने और शासन-प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं । प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा सरकारी कार्यालयों में निजी कर्मचारियों से कार्य न कराए जाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं । जिलाधिकारी डा. राजा गणपति आर ने भी सभी विभागों को निर्देशित किया है कि सरकारी कार्य केवल अधिकृत कर्मचारियों द्वारा ही संपादित कराए जाय । इसके बावजूद विकासखंड कार्यालय मिश्रित में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है । स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत सचिव केशव राना द्वारा निजी मुंशियों को सरकारी कार्यों में लगाया गया है। यह कथित मुंशी प्रति दिन कार्यालय पहुंचकर परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र तथा दिब्यांग आवास जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को बिना सुविधा शुल्क के नही करते है । उदाहरण के तौर पर ग्राम पंचायत जसरथपुर निवासी 90 प्रतिशत दिब्यांग अमन मौर्य पुत्र अयोध्या प्रसाद मौर्य ने फरवरी 2026 में दिब्यांग आवास कराने हेतु अपने अभिलेख पंचायत सचिव केशव राना को दिया था । परन्तु दिब्यांग और गरीब होने के कारण वह उनकी और उनके कथित मुंशी की इच्छा पूर्ती नही कर सका । जिससे सैकड़ाें बार ब्लाक के चक्कर लगाने के बावजूद भी उसका दिब्यांग आवास स्वीकृत नही किया गया । उसके अभिलेख पंचायत सचिव व्दारा रद्दी की टोकरी में डाल कर गुम कर दिए गए । इसी तरह मजरा फुलवारी निवासी गरीब ब्राम्हण पंडित जी के अंत्योदय कार्ड का प्रस्ताव होना था । जिसमें ब्लाक प्रमुख रामकिंकर पांडेय ने स्वयं फोन करके कहा था । कि ग्राम पंचायत जसरथपुर में तीन अंत्योदय कार्ड रिक्त चल रहे है । एक कार्ड पर इनका प्रस्ताव करके प्रमुख कार्यालय को उपलब्ध करा दे । परन्तु एक मांह बीत जाने के बाद भी सुविधा शुलिक के अभाव में पंचायत सचिव व्दारा प्रस्ताव की प्रति प्रमुख कार्यालय में आज तक उपलब्ध नही कराई गई है । सूत्रों की माने तो पंचायत सचिव विभिन्न प्रमांण पत्रों एवं अभिलेखों के लिए स्वयं सुविधा शुल्क न लेकर अपने कथित मुंशियों को माध्यम बना रहे है । ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत सहायकों और रोजगार सेवकों की तैनाती पहले से की गई है, ऐसे में निजी व्यक्तियों से सरकारी कार्य कराए जाने का औचित्य समझ से परे है। सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति और मानदेय के यह निजी मुंशी नियमित रूप से सरकारी कार्य कैसे कर रहे हैं । आरोपों के अनुसार, उक्त निजी मुंशी ब्लाक परिसर स्थित सरकारी आवास पर कब्जा जमाकर वहीं से कार्यों का संचालन कर रहे हैं। यदि यह आरोप सही हैं । तो शासन की मंशा तथा प्रशासनिक निर्देशों की खुली अवहेलना है । क्षेत्रीय नागरिकों ने मांमले की निष्पक्ष जांच कराकर कार्यवाही करने की मांग की है ।
सीतापुर:ग्राम पंचायत सचिव केशव राना की मनमानी कार्य शैली क्षेत्र में बनी चर्चा का बिषय
