Tuesday, 15 September 2026 | 2:38 PM
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पीलीभीत:भ्रष्टाचार और हठधर्मिता की मंडी में खुली पोल, सचिव पर भड़के किसान

बीसलपुर /पीलीभीत। बीसलपुर मंडी में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के नेतृत्व में किसानों का आक्रोश उस वक्त फूट पड़ा जब मंडी सचिव नाजिम अली पर भ्रष्टाचार, बदसलूकी और गंदगी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा खोल दिया। शांतिपूर्ण धरना देने पहुंचे किसानों को सचिव द्वारा गंदगी में बैठाया ग
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पीलीभीत:भ्रष्टाचार और हठधर्मिता की मंडी में खुली पोल, सचिव पर भड़के किसान
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बीसलपुर /पीलीभीत।
बीसलपुर मंडी में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के नेतृत्व में किसानों का आक्रोश उस वक्त फूट पड़ा जब मंडी सचिव नाजिम अली पर भ्रष्टाचार, बदसलूकी और गंदगी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा खोल दिया। शांतिपूर्ण धरना देने पहुंचे किसानों को सचिव द्वारा गंदगी में बैठाया गया और कथित रूप से उनके साथ अभद्रता की गई, जिससे माहौल गर्मा गया।
धरना स्थल पर पहुंचे भाकियू (भानु) के जिलाध्यक्ष भजनलाल कोधी ने मंडी सचिव पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि मंडी में किसान नहीं, व्यापारी राज कर रहे हैं। “यह मंडी किसानों की है, लेकिन यहां उन्हें अपमान और गंदगी मिलती है, जबकि उद्योगपतियों के लिए कालीन बिछाया जाता है,” उन्होंने कहा।
मंडल अध्यक्ष लालू मिश्रा, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष निसार शाह, तहसील उपाध्यक्ष कुलदीप मिश्रा, ब्लॉक अध्यक्ष सुखदेव सिंह, हरिओम शर्मा, जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश राजपूत, पूरनपुर तहसील मीडिया सबलू खा और बीसलपुर तहसील मीडिया प्रभारी दीनदयाल शास्त्री सहित कई पदाधिकारियों ने मंडी सचिव की कार्यशैली को किसान विरोधी बताते हुए जमकर विरोध जताया। धरने में शामिल जगदीश प्रसाद, नंदराम, संजीव कुमार, राजपाल, विमला देवी, अनीता देवी, मुन्नी देवी, जमुना देवी, गीता देवी, दनने बख्श, और आले मोहम्मद जैसे किसान प्रतिनिधियों ने भी मंडी की दुर्दशा पर खुलकर आवाज उठाई और सचिव को मौके पर ही जमकर खरी-खोटी सुनाई। किसानों की मांग थी कि मंडी सचिव को तत्काल हटाया जाए, सफाईकर्मी तैनात किए जाएं, शौचालय, पीने का पानी, छाया और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, साथ ही नीलामी चबूतरे व टीनशेड की मरम्मत कराई जाए।
धरना स्थल पर पहुंचे तहसीलदार ने किसानों की बात गंभीरता से सुनी और ज्ञापन लिया। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि मांगे पूरी नहीं की गईं तो किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।